BENGAL ELECTION WIN : Pawan Sai’s stature rises with Bengal win
रायपुर। छत्तीसगढ़ भाजपा में बंगाल की जीत से उत्साह का माहौल है, और इसकी बड़ी वजह पश्चिम बंगाल से आई चुनावी सफलता है। भाजपा संगठन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे पवन साय ने पिछले छह महीनों से पश्चिम बंगाल में डेरा डालकर चुनावी रणनीति पर काम किया। उन्हें लगभग 40 सीटों की जिम्मेदारी सौंपी गई थी, जिनमें से अधिकांश पर पार्टी को सफलता मिली है।
बंगाल में छत्तीसगढ़ टीम की सक्रियता
पवन साय के साथ छत्तीसगढ़ से मंत्री, विधायक और संगठन के सैकड़ों कार्यकर्ता भी बंगाल पहुंचे थे। चुनावी प्रबंधन, बूथ स्तर की रणनीति और मतदाता संपर्क अभियान में इनकी सक्रिय भूमिका रही। राज्य के दोनों उपमुख्यमंत्री समेत कई मंत्री और निगम-मंडल के पदाधिकारी भी अलग-अलग क्षेत्रों में जिम्मेदारी संभालते नजर आए। जैसा कि मालूम हो कि, प्रदेश संगठन मंत्री पवन साय राज्य में भाजपा संगठन के महत्वपूर्ण पद पर बरसों से हैं। एक तरफ जहां राज्य में भाजपा की वापसी हुई तो दूसरी तरफ संगठन को मजबूत रखने की जिम्मेदारी भी उन्हीं के कंधों पर है। अब बंगाल में जिस तरह से संगठन को मजबूत कर परिणाम लाया गया है उससे पवन साय का पार्टी में कद बढ़ गया है।
जीत के बाद छत्तीसगढ़ में जश्न
इस सफलता के बाद छत्तीसगढ़ में भाजपा कार्यकर्ताओं और नेताओं के बीच खासा उत्साह देखा जा रहा है। कई जगहों पर जश्न, मिठाई वितरण किए जा रहे हैं। मंत्री ओपी चौधरी ने फ्री में झालमुड़ी खिलाया जो सोशल मीडिया में वायरल हो रहा है। कार्यकर्ताओं का कहना है कि यह जीत संगठन की एकजुटता और रणनीतिक मेहनत का परिणाम है।
जानकारी के अनुसार: दो उप मुख्यमंत्रियों के अलावा केदार कश्यप, ओपी चौधरी, पूर्व मंत्री राजेश मूणत, विधायक सुशांत शुक्ला, पर्यटन मंडल अध्यक्ष नीलू शर्मा सहित कई लोग बंगाल में दौरे कर चुनावी मोर्चा संभालने का काम किया। छत्तीसगढ़ के कई नेताओं ने बूथ मैनेजमेंट और कार्यकर्ता समन्वय में महत्वपूर्ण योगदान दिया युवा विधायकों को खासतौर पर सोशल मीडिया और जमीनी प्रचार अभियान की जिम्मेदारी दी गई थी।
हालांकि, सभी नेताओं की व्यक्तिगत भूमिका का विस्तृत आधिकारिक ब्यौरा अभी सामने नहीं आया है, लेकिन स्थानीय स्तर पर यह माना जा रहा है कि यह सामूहिक प्रयास था, जिसमें छत्तीसगढ़ टीम ने अहम बैक एंड सपोर्ट दिया। इस जीत से छत्तीसगढ़ भाजपा संगठन को नई ऊर्जा मिली है। आने वाले चुनावों में इस अनुभव का इस्तेमाल रणनीतिक बढ़त के रूप में किया जाएगा।

