CHHATTISGARH : Children’s dangerous journey on incomplete bridge, NHRC action!
गरियाबंद। अधूरे पुल से जान जोखिम में डालकर नदी पार कर स्कूल जाने वाले बच्चों के मामले में अब राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग (NHRC) ने एक्शन लिया है। आयोग ने इसे बच्चों की सुरक्षा और मानवाधिकार से जुड़ा गंभीर मामला मानते हुए छत्तीसगढ़ के मुख्य सचिव को नोटिस जारी किया है।
मामला मैनपुर ब्लॉक के खामभाठा गांव का है। यहां पैरी नदी पर करीब 6 साल से पुल का निर्माण अधूरा पड़ा है। इसी रास्ते से 30 से ज्यादा स्कूली बच्चे रोजाना स्कूल पहुंचते हैं।
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ग्रामीणों के मुताबिक बारिश में नदी का बहाव तेज होने पर खतरा और बढ़ जाता है। बच्चों को करीब 20 फीट ऊंची सीढ़ी चढ़कर अधूरे पुल तक पहुंचना पड़ता है। इसके बाद सेंटरिंग प्लेट और प्लाई के सहारे नदी पार करनी पड़ती है। पुल के दोनों ओर गहरी खाई और निकले हुए सरिए भी हादसे का खतरा बढ़ा रहे हैं।
मामला सामने आने के बाद शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने इलाके का दौरा किया। इसके बाद सेतु शाखा ने लोहे की छड़ वाली सीढ़ी हटाकर सेंटरिंग प्लेट से सीढ़ी बनवा दी, लेकिन नदी पार करने की मूल समस्या अभी भी बनी हुई है।
5.66 करोड़ का पुल, 6 साल से अधूरा
पंचायत मुख्यालय देहारगुड़ा और खामभाठा के बीच पैरी नदी पर 90 मीटर पुलिया के लिए 2021 में 5 करोड़ 66 लाख रुपए मंजूर हुए थे। 2023 में तकनीकी स्वीकृति मिली और इसे 2025 तक पूरा किया जाना था, लेकिन काम अब तक अधूरा है।
विभाग के मुताबिक ठेका कंपनी को करीब 70 फीसदी भुगतान किया जा चुका है। देरी के कारण कंपनी पर दो बार पेनाल्टी भी लगाई गई है और काम पूरा करने के लिए समय बढ़ाया गया है।
सेतु शाखा के इंजीनियर फागूलाल रात्रे का दावा है कि करीब 70 फीसदी काम पूरा हो चुका है और एप्रोच का काम बाकी है। बारिश खत्म होने के बाद इसे जल्द पूरा कराने की बात कही गई है।
वहीं जिला पंचायत सदस्य संजय नेताम ने निर्माण में देरी को लेकर विभाग और ठेका कंपनी पर सवाल उठाए हैं।
