BILASPUR POLICE SYSTEM : Has the police failed in Bilaspur? The speed of minors proved fatal!
बिलासपुर | विशेष संवाददाता (खबर चालीसा)
न्यायधानी बिलासपुर अब सिर्फ ‘क्राइम कैपिटल’ ही नहीं, बल्कि ‘डेथ जोन’ में तब्दील हो चुकी है। शहर की कानून-व्यवस्था और ट्रैफिक सिस्टम पूरी तरह से चरमरा गया है। एक तरफ जहां बेखौफ अपराधी सरेआम गोलियां चला रहे हैं, डकैती कर रहे हैं और गला रेत रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ शहर की सड़कें बेलगाम नाबालिगों के हवाले हो गई हैं।
पुलिस प्रशासन लगातार यह दावा कर रहा है कि वह अपराधियों पर नकेल कसने, गश्त बढ़ाने और चेकिंग अभियान चलाने के लिए दिन-रात काम कर रहा है। लेकिन ‘खबर चालीसा’ का सिस्टम से सबसे बड़ा और सीधा सवाल यही है- “अगर पुलिस सच में इतना काम कर रही है, तो बिलासपुर में अपराध कम क्यों नहीं हो रहे?” हाल ही में हुए एक दर्दनाक सड़क हादसे और सिलसिलेवार वारदातों ने पूरे शहर को झकझोर कर रख दिया है। इन घटनाओं ने साबित कर दिया है कि पुलिस के सारे दावे सिर्फ कागजी और हवा-हवाई हैं।
ये हैं वे खौफनाक वारदातें, जिन्होंने पुलिस के ‘सख्त कार्रवाई’ के दावों की पोल खोल दी है:
1. स्मार्ट रोड पर ‘मौत की रफ़्तार’ : नाबालिग ने छीनी 17 वर्षीय रुद्र प्रताप की जिंदगी
बिलासपुर की सड़कों पर नाबालिगों के हाथों में तेज रफ्तार गाड़ियों की स्टेयरिंग बेगुनाहों की जान ले रही है। हाल ही में पद्मश्री श्यामलाल चतुर्वेदी स्मार्ट रोड (वेयरहाउस रोड के पास) पर एक भीषण हादसा हुआ। सुबह के वक्त मंगला अभिषेक विहार निवासी 17 वर्षीय रुद्र प्रताप शर्मा (महर्षि स्कूल का 11वीं का छात्र) अपनी एक्टिवा से जा रहा था। तभी सामने से आ रही एक तेज रफ्तार कार ने उसे इतनी जोरदार टक्कर मारी कि रुद्र 10 फीट हवा में उछलकर सड़क पर गिरा।
टक्कर के बाद अनियंत्रित कार सामने से आ रही एक स्कूल मिनी-बस से भी जा भिड़ी। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, कार एक नाबालिग छात्र चला रहा था और उसमें अन्य नाबालिग भी सवार थे, जो घटना के बाद कार छोड़कर फरार हो गए। रुद्र के सिर पर गंभीर चोटें आईं और अपोलो अस्पताल में इलाज के दौरान उसने दम तोड़ दिया। यह हादसा सिर्फ एक दुर्घटना नहीं, बल्कि ट्रैफिक पुलिस और बिना लाइसेंस नाबालिगों को गाड़ी देने वाले परिजनों के मुंह पर करारा तमाचा है।
2. सराफा व्यापारी से 3.35 करोड़ की डकैती : पुलिस की नाक के नीचे उड़ गया सुकून
सरकंडा (राजकिशोर नगर) में नकाबपोश बदमाशों ने महालक्ष्मी ज्वैलर्स के संचालक की कार को बीच सड़क पर टक्कर मारी। सरेआम पिस्तौल तानी और 3.35 करोड़ (2.2 किलो सोना और कैश) लूटकर फरार हो गए। विरोध करने पर पिस्तौल की बट और हथौड़े से व्यापारी का सिर फोड़ दिया गया। जब पुलिस इतनी ही मुस्तैद है, तो इतने बड़े हथियारों के साथ अपराधी शहर में कैसे घूम रहे थे?
3. मस्तूरी गोलीकांड : सरेआम फायरिंग, वर्चस्व की खूनी जंग
मस्तूरी इलाके में अपराधियों ने दिनदहाड़े गोलियां बरसाकर पुलिस को खुली चुनौती दी। आपसी रंजिश में बदमाशों ने एक दफ्तर के बाहर ताबड़तोड़ फायरिंग कर दी, जिसमें दो निर्दोष लोगों को गोलियां लगीं। जेल से छूटे बदमाश खुलेआम पिस्तौल लहरा रहे हैं और पुलिस का मुखबिर तंत्र गहरी नींद में सोया हुआ है।
4. तोरवा बना ‘मर्डर जोन’ : भट्ठी के पास सरेआम कत्ल और बुजुर्ग का रेता गला
तोरवा थाना क्षेत्र में अपराधियों ने पुलिस की गश्त को तमाचा मारा है। देवरीखुर्द शराब भट्ठी के पास ऑटो चालक को सरेआम चाकू घोंपकर मार डाला गया। इसी क्षेत्र में एक 65 साल के बुजुर्ग का दिनदहाड़े गला रेत दिया गया। शराब दुकानों के आस-पास असामाजिक तत्वों का जमावड़ा लगता है, लेकिन पुलिस की पेट्रोलिंग सिर्फ वीआईपी (VIP) रूट तक सीमित है।
5. जेल में ‘खूनी खेल’ और श्मशान में ‘अंधेरगर्दी’
अपराधी अति-सुरक्षित सेंट्रल जेल के भीतर भी बेखौफ हैं, जहां एक कैदी का सिर सीमेंट के स्लैब से कुचलकर निर्मम हत्या कर दी जाती है। वहीं देवरीखुर्द के श्मशान घाट में अपराधी अपनी जमानत के लिए हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस की फोटो पर तंत्र-मंत्र करते पकड़े जाते हैं। यह पुलिस के इंटेलिजेंस (Intelligence) की सबसे शर्मनाक हार है।
पुलिस के खोखले दावों पर ‘खबर चालीसा’ के चुभते सवाल :
पुलिस के आला अधिकारी रोज नए आंकड़े पेश कर अपनी पीठ थपथपा रहे हैं, लेकिन बिलासपुर की जनता पूछ रही है:
जब पुलिस ‘इतना काम’ कर रही है, तो अपराध कम क्यों नहीं हो रहे? अपराधियों में खाकी का खौफ जीरो क्यों है?
नाबालिगों को मौत बांटने की छूट क्यों? 11वीं के छात्र रुद्र प्रताप की मौत का जिम्मेदार सिर्फ वह नाबालिग कार चालक नहीं, बल्कि ट्रैफिक पुलिस भी है। बिना लाइसेंस के गाड़ियां दौड़ा रहे नाबालिगों और उन्हें गाड़ी थमाने वाले परिजनों पर ‘मोटर व्हीकल एक्ट’ के तहत कड़ी कार्रवाई क्यों नहीं की जा रही?
क्या पुलिस सिर्फ ‘शव उठाने’ और ‘FIR लिखने’ के लिए रह गई है? हत्या, डकैती और सड़क हादसों को होने से पहले रोकने का प्रिवेंटिव एक्शन (Preventive Action) कहां गायब हो गया है?
रात और सुबह की गश्त क्या सिर्फ कागजों पर है? जब शहर में सुबह-सुबह रफ़्तार का कहर बरपाया जा रहा है और रात भर पिस्तौल-चाकू लहराए जा रहे हैं, तो चौराहों पर तैनात पीसीआर (PCR) और ट्रैफिक अमला क्या कर रहा है?
शराब भट्ठियों के पास गुंडागर्दी पर छूट क्यों? हर शराब दुकान के बाहर असामाजिक तत्वों का अड्डा हत्याओं का कारण बन रहा है। वहां पुलिस का डंडा क्यों नहीं चलता?
बिलासपुर अब सुरक्षित शहर नहीं रहा। पैदल चलना हो, गाड़ी चलाना हो या अपनी दुकान पर बैठना हो, आम आदमी हर जगह खौफ में है। पुलिस चाहे जितने दावे कर ले, लेकिन एक होनहार छात्र (रुद्र) की दर्दनाक मौत और लगातार हो रहे खूनी खेलों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि पुलिस की कार्यप्रणाली पूरी तरह फेल है। अगर प्रशासन अब भी नींद से नहीं जागा, तो न्यायधानी पूरी तरह से ‘माफियाओं और बेलगाम स्टंटबाजों’ के हवाले हो जाएगी.
