रहस्यमयी पुराने गोलाकार पत्थर को देखकर पुरातत्वविदों की टीम भी चौंकी, सात हजार साल पुराने हो सकते पत्थर

Date:

  • चेक रिपब्लिक की राजधानी प्राग के एक इलाके में खोज के बाद बताया गया कि अभी इस बारे में और भी रिसर्च की जा रही है.

नई दिल्ली: दुनिया में इतने ज्यादा रहस्य छुपे हैं, जिनकी कल्पना भी लोग नहीं कर पाते हैं. कई बार इतनी ज्यादा पुरानी चीजों की खोज हो जाती है, जिसे देखकर पुरातत्वविद भी हैरान रह जाते हैं. ऐसा ही कुछ चेक रिपब्लिक के प्राग में मिला है, जिसपर दुनिया भर के लोगों की नजरें टिक गई हैं. खोज करने वाली टीम को लीड कर रहे पुरातत्वविद मिरोसलव कराउस ने इस बारे में रेडियो प्राग इंटरनेशनल से बताया कि स्टोन एज के दौरान ही इन राउंडल्स का निर्माण किया गया है. यह उस समय के हैं, जब लोहे की खोज भी नहीं हुई थी.

पुरातत्वविद ने बताया कि उस समय पर इसे एक आर्थिक और व्यापार केंद्र की तरह इस्तेमाल किया होगा. या यह एक धार्मिक पंथ का केंद्र भी हो सकता है. वहीं पुरातत्वविद जारोसलव रिद्की ने लाइव साइंस को बताया कि राउंडेल बनाने वाले लोगों के बारे में कम ही जानकारी मिल सकी है. रिद्की के अनुसार, इसे बनाने वाले मिट्टी की कला से जुड़े लोग थे, जो 4900 बीसीई से 4400 बीसीई तक एक्टिव रहे थे. दरअसल, प्राग में स्टोनहेंज और मिस्र के पिरामिडों से भी पुराने स्टोन राउंडेल (गोल आकार का पत्थर) की खोज की गई है. पत्थर के आसपास खुदाई में भी कई ऐसी प्राचीन चीजें मिली हैं, जिनको लेकर भी सटीक जानकारी जुटाई जा रही है.

पुरातत्वविदों का कहना है कि इसका निर्माण स्टोन एज के समय में करीब 7 हजार साल पहले हुआ होगा. हालांकि, इसे क्यों बनाया होगा, इसका अभी तक कारण नहीं पता चल पाया है. चेक एकेडमी ऑफ साइंस के पुरातत्व विभाग के जारोसलव रिद्की ने रेडियो प्राग इंटरनेशनल से बातचीत में बताया कि राउंडेल (एक तरह का गोलाकार पत्थर) पूरे यूरोप में आर्किटेक्चर का सबसे पुराना सबूत है. खास बात है कि इस गोलाकार निओलिथिक स्ट्रक्चर की चौड़ाई करीब 180 फीट है, जो पीसा की मीनार से भी ज्यादा लंबा है और इसके तीन द्वार हैं. खास बात है कि साल 1980 में ही इस इलाके में गैस और पानी की लाइन डालते समय मजदूरों ने ऐतिहासिक राउंडेल की खोज कर ली थी. लेकिन अब करीब 40 सालों के बाद इसकी खोज पूरी तरह की गई है.

पुरातत्वविद रिद्की ने बताया कि इन्हीं लोगों ने चेक रिपब्लिक के बोहेमिया इलाके में भी ऐसे ही राउंडेल्स का निर्माण किया था. इन लोगों के ऐसे ही करीब 200 उदाहरण सेंट्रल से ईस्टर्न यूरोप तक भी देखे जा सकते हैं. पिछले कुछ सालों में ड्रोन की मदद से हवा में ऊंचाई से की गई फोटोग्राफी से भी दूसरे राउंडेल उदाहरणों को पहचानने में काफी मदद मिली है. अब इस नए गोलाकार पत्थर की खोज के दौरान जब खुदाई की गई तो कई खास चीजें भी इसके नीचे दबी हुई मिलीं. इनमें मिट्टी के बर्तनों के टूटे हुए टुकड़े, जानवरों की हड्डियां और पत्थरों से बने हथियार शामिल हैं. पुरातत्वविदों का कहना है कि कार्बन डेटिंग की मदद से इन सभी चीजों के निर्माण की सही तारीख और पता चल जाएगा कि यह अवशेष पास के ही निओलिथिक सेटलमेंट से जुड़े हुए हैं.

Share post:

Subscribe

spot_imgspot_img
spot_imgspot_img

#Crime Updates

More like this
Related