RAIPUR IPL MATCH: Anger over IPL chaos and complimentary tickets
RAIPUR IPL MATCH: राजधानी में IPL मैच में अव्यवस्था को लेकर चर्चा कम नहीं हो रही है। एक तरफ जहां पर स्टेडियम में मिलने वाले महंगे खाद्य वस्तुओं को लेकर लोगों में नाराजगी दिखी तो क्रिकेट प्लेयर भी इस बार व्यवस्था को लेकर निराश थे।
इससे भी बड़ी बात यह कि मैच के कॉम्प्लीमेंट्री टिकट के लिए असंतोष सामने आया है क्योंकि आला अधिकारियों और नेताओं को टिकट नहीं मिलने से उदास थे।
हैरानी तो इस बात पर है कि खेल विभाग के अधिकारियों को मैच देखने का का जुगाड़ नहीं हो पाया, जिससे विभाग में असंतोष फैल गया है।
IPL में RCB की टीम की दो मैच राजधानी नवा रायपुर में मैच होने से प्रदेश में लाइव मैच देखने के लिए लोग दूर-दूर से देखने के लिए पहुंचे थे। लेकिन परिवार के साथ मैच के दौरान पानी व अन्य खाद्य वस्तुओं के महंगे होने से दर्शकों को एक बार फिर दुखी होना पड़ा।
व्यावसायिक क्रिकेट होने की वजह से IPL टिकट की मारामारी इस बार भी थी। लेकिन व्यवस्था को लेकर अलग-अलग स्तर पर लोगों में रोष है। एक तरफ यह बात भी सामने आ रही है कि अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट खिलाड़ियों के बाहर प्रैक्टिस को लेकर नाराजगी सामने आई है।
जैसा कि मालूम हो कि, बीसीसीआई ने खिलाड़ियों के लिए नियम और भी कड़े कर दिए हैं। शायद इस स्थिति में मुंबई इंडियंस के खिलाड़ी बाहर प्रैक्टिस करने गए थे। लेकिन यहां अव्यस्था को लेकर खिलाड़ियों की नाराजगी सामने आ गई। हालांकि बात छन-छन के आ रही है और लोग खुलकर बोलने से बच रहे हैं।
इधर नवा रायपुर के अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम में आईपीएल के दो मैचों के पास को लेकर खूब चर्चा है। एक तरफ जहां मीडिया हाउस को उनकी पहचान के अनुसार दो से लेकर एक दर्जन टिकट दिये गए। जबकि नेताओं और अधिकारियों को मैच की टिकट नहीं मिल पाई ।
अधिकारियों को मैच की टिकट को लेकर कोई पूछ-परख नहीं होने से अधिकांश निराश थे। मजे की बात तो यह है कि खेल विभाग के कई अधिकारी भी आईपीएल टिकट से महरूम हो गए। बताया जाता है कि मंत्रालय के सचिव स्तर के ने सारी टिकटें दबा ली और अपने रिश्तेदारों पर न्यौछावर कर दिया। दबी जुबां से लोग बोल रहे हैं कि साहब के ससुराल वालों का ही वीआईपी दर्शक-दीर्घा में जलवा था।
एक अफसर इस बात पर भारी रोष प्रकट भी किया। लेकिन इस गुस्से का असर उस घाघ अधिकारी को नहीं हुआ, जो जिलों में अपनी छाप छोड़कर पहले से आए हैं। वर्तमान जिम्मेदारी में घाघ अफसर के हाथ वैसे भी बंधे हुए हैं।
इस स्थिति में आईपीएल टिकट उनके लिए लपकने वाला अवसर था। लेकिन इस मामले से विभाग में बड़ा असंतोष सामने आ गया है। इधर मंत्रालय के आला अधिकारियों को भी उम्मीद थी उन्हें कॉर्पोरेट बाक्स नहीं तो दो-तीन वीआईपी टिकट जरूर मिल जाएगा। लेकिन व्यवस्था ऐसी नहीं थी कि, टिकट को लेकर कोई पूछपरख हो।
इस कारण इस फ्री टिकट के चक्कर में एक कई विभागों में नैराश्य बोध की अनुगूंज है। कामकाज की भी कोई संस्कृति होती है। जो अचानक नहीं बन पाती। वह केवल समझ से बनते-बनते बनती है। लेकिन वर्तमान युवा अफसरों के कारण यह परिपाटी छिन्न-भिन्न होती नजर आ रही है, जिसमें सीनियर अफसरों के मान-मर्यादा टूटता नजर आ रहा है।

