Maharashtra Mandal and Maharashtra Sanskar Kendra organized a collective Upanayan Sanskar (thread ceremony) for 10 young boys.
रायपुर। महाराष्ट्र मंडल के संत ज्ञानेश्वर सभागृह में मंगलवार को हुए सामूहिक मुंज संस्कार के बाद जब बच्चों ने अपनी माताओं से भिक्षा मांगी, तो पूरा मंडल परिसर ‘ओम भवति भिक्षां देहि…’ की नाद से गूंज उठा। महाराष्ट्र मंडल और महाराष्ट्र संस्कार केंद्र के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित मुंज संस्कार में 10 बटुकों का उपनयन संस्कार मराठी संस्कृति से संपन्न कराया गया।
महाराष्ट्र मंडल के सचिव और महाराष्ट्र संस्कार केंद्र के संस्थापक चेतन दंडवते ने बताया कि ‘ओम भवति भिक्षां देहि’ मंत्र के साथ बटुक माताओं से भिक्षा मांगते हैं और अध्ययन के लिए काशी की यात्रा पर जाते हैं। ‘चतुर्वेदान् षट्शास्त्राणि अष्टादशपुराणानि पठिता भवामि‘ अर्थात् ‘हे माई! मुझे भिक्षा दें, ताकि मैं चारों वेद, छह शास्त्र और 18 पुराणों का अध्ययन कर सकूं।‘
आचार्य दंडवते व अन्य आचार्यजनों ने विधि विधान और वेद मंत्रोच्चार के साथ इन बटुकों का आज षोडस संस्कारों में से एक उपनयन संस्कार संपन्न कराया। आचार्य दंडवते का साथ योगेश दंडवते, अजय पोतदार, पंकज सराफ, अभिषेक बक्षी और पार्थ सारथी देशपांडे ने दिया। रायपुर से उत्कर्ष पंकज जोशी, संस्कार समीर वरहाड़पांडे, रोहिन राहुल वरहाडपांडे, अहान अतुल राहटगांवकर, तनुष तुषार विंचुरकर और प्रथमेश आशीष मोडक का मुंज संपन्न हुआ। वहीं दुर्ग निवासी अमित जोशी अपने दोनों पुत्रों नीरव और आरव, दक्ष भुसारी बिलासपुर और जबलपुर से आदीश हर्षे का भी मुंज कराया गया। बताते चलें कि महाराष्ट्र संस्कार केंद्र और महाराष्ट्र मंडल के संयुक्त तत्वावधान अब तक तकरीबन 300 से अधिक बटुकों का उपनयन संस्कार कराया जा चुका है।
आचार्य दंडवते ने बताया कि सुबह 8.30 बजे उपनयन संस्कार की प्रक्रिया प्रारंभ की गई। सबसे पहले मंडप पूजन किया गया। इसके पश्चात मातृका पूजन एवं मातृभोज, फिर मंगलाष्टक संपन्न कराया गया। वैदिक मंत्रोच्चार के साथ विधि संपन्न कराने के बाद सभी बटुकों ने भिक्षाटन कर काशी की यात्रा की। आयोजन में गीता दलाल, रेणुका पुराणिक, नमिता शेष, पल्लवी मुकादम, मेघा पोतदार, डॉ. शुचिता देशमुख, प्रिया बक्षी, भारती पलसोदकर, अंकिता किरवई, यशस्वी दंडवते, अक्षता पंडित, अंजलि काले, सृष्टि दंडवते, गौरी क्षीरसागर, संध्या खंगन, दीपक किरवईवाले, सृजन दंडवते, स्मिता देशपांडे सहित अन्य कार्यकर्ताओं का विशेष सहयोग रहा।
वैदिक परंपरा में षोडश संस्कार (16 संस्कार) वह महत्वपूर्ण कर्म और अनुष्ठान है, जो मनुष्य के जन्म से लेकर मृत्यु तक उसके शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक विकास के लिए किए जाते हैं। इन संस्कारों में से एक है यज्ञोपवीत संस्कार। यह व्यक्ति को अनुशासन, ज्ञान और धर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देते हैं।

