राज्य में नशा मुक्ति की मुहिम के लिए कार्ययोजना तैयार करने पर हुआ विचार मंथन

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रायपुर। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की पहल पर राज्य में जल्द ही नशा मुक्ति अभियान चलाया जाएगा। नशा मुक्ति के लिए व्यापक जनजागरण अभियान में सामाजिक और स्वयंसेवी संस्थाओं की भागीदारी सहित विभिन्न पहलुओं पर कार्ययोजना तैयार करने के लिए आज विस्तृत विचार विमर्श किया गया। समाज कल्याण विभाग द्वारा राजधानी स्थित एक निजी होटल में नशा मुक्ति से संबंधित परामर्श बैठक आयोजित की गई।

बैठक में भारत सरकार सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय नई दिल्ली की सुश्री स्वरानंदा, डब्ल्यूएचओ के प्रतिनिधि उरया नाग और यूनिसेफ के प्रतिनिधि पंकज नायर के साथ ही एम्स के प्रोफेसर डॉ. यतन पाल बल्हारा सहित अन्य विशेषज्ञ शामिल हुए। गौरतलब है कि मुख्यमंत्री ने प्रदेश में नशा मुक्ति अभियान से सामाजिक संस्थाओं को जोड़ने और लोगों में जन जागरूकता के लिए नोडल एजेंसी गठन कर विशेष अभियान चलाने के निर्देश दिए हैं।

नशा मुक्ति अभियान के लिए कार्य योजना तैयार करने आहुत की गई इस बैठक में एम्स के प्रोफेसर डॉ. यतन पाल बल्हारा ने कहा कि नशामुक्ति के लिए जन साधारण तक पहुंचने के लिए बड़े पैमाने पर लोगों से जुड़ना जरूरी है। बच्चों तक पहुंचने के लिए शिक्षा विभाग को व्यापक स्तर पर कार्ययोजना बनाना होगा। छत्तीसगढ़ सरकार अन्य राज्यों से बेहतर इस दिशा में काम कर रही है।

नशा सामाजिक, पारिवारिक और व्यक्तिगत समस्या के रूप में उभरकर आता है। नशे के आदी व्यक्ति को व्यसन मुक्त करने के लिए लगातार कार्य करने की आवश्यकता है। सभी को अपनी जिम्मेदारी का निर्वहन करना होगा। भारत सरकार सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय नई दिल्ली की सुश्री स्वरानंदा, डब्ल्यूएचओ के प्रतिनिधि उरया नाग और यूनिसेफ के प्रतिनिधि पंकज नायर ने नशा मुक्ति के लिए राज्य सरकार द्वारा किए जा रहे कार्याें की प्रशंसा की।

बैठक में विशेषज्ञों ने कहा कि नशा मुक्ति हेतु जन जागरूकता लाने न केवल शासन, अपितु सामाजिक और स्वयंसेवी संस्थाओं को समन्वय के साथ काम करने की जरूरत है। स्वस्थ्य समाज निर्माण के लिए समाज को व्यवस्थित और संगठित करना जरूरी है। यह तभी संभव होगा, जब समाज में लोगों का मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य बेहतर हो। विशेषज्ञों ने कहा कि नई पीढ़ी विशेषकर युवा वर्ग को नशे की लत से दूर रखना जरूरी है। नशा उन्मूलन के लिए शासन और निजी स्तर पर व्यापक रूप से अभियान चलाए जाने की आवश्यकता है। नशा से केवल शरीर का ही नहीं अपितु परिवार और समाज का नाश होता है।

विशेषज्ञों ने बताया कि प्रायः यह देखा गया है कि विभिन्न अपराधों की जड़ में नशा एक प्रमुख कारण के रूप में उभरकर सामने आया है। राज्य में मुख्यतः शराब, गांजा, भांग, गुड़ाखू, बीड़ी, सिगरेट, ब्राउन शुगर, दर्द निवारक औषधियां, सूंघ कर लिया जाने वाला नशा आदि के पीड़ित हैं। बैठक में व्यक्ति द्वारा नशापान करने का कारण, नशा मुक्त करने का उपाय, जन जागरूकता सृजन के लिए विस्तृत रूपरेखा और नशा मुक्ति उपरांत आर्थिक और सामाजिक पुनर्वास व्यवस्था हेतु गृह विभाग, स्वास्थ्य विभाग, समाज कल्याण विभाग, भारत सरकार सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय नई दिल्ली, एम्स नई दिल्ली, यूनिसेफ, विश्व स्वास्थ्य संगठन और एनजीओ के प्रतिनिधियों ने अपने विचार रखे।

बैठक में समाज कल्याण विभाग के सचिव भुवनेश यादव ने कहा कि नशे के विरूद्ध जागरूकता लाने के लिए स्कूल शिक्षा विभाग, समाज कल्याण विभाग और पंचायत विभाग अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। साथ ही महिला बाल विकास विभाग भी नशा मुक्ति के लिए स्व-सहायता समूह की महिलाओं तथा आंगनबाड़ी केन्द्रों का सहयोग ले सकते हैं। भारतीय पुलिस सेवा के संदीप पटेल ने नशा से मुक्ति दिलाने से संबंधित विभिन्न सफलता की कहानियों से परिचित कराया। उन्होंने कहा कि अधिकांश अपराधों और दुर्घटना में नशा मुख्य कारण होता है। नशा उन्मूलन के लिए बिलासपुर जिले में पुलिस और यूनिसेफ मिलकर ‘निजात अभियान‘ चला रहा है।

स्वास्थ्य विभाग केे डॉ. संजय नामदेव ने बताया कि मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत लोगों को नशामुक्ति के लिए प्रेरित किया जाता है। अस्पतालों में इसके लिए मनोवैज्ञानिक चिकित्सकों की मदद ली जाती है। नशा ग्रसित व्यक्ति की काउंसलिंग की जाती है। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में नशावृत्ति को चिन्हांकित करते हैं। शराब और तंबाखू के सेवन करने वालों की संख्या अधिक है।

मितानिन के माध्यम से लोगों को उपलब्ध स्वास्थ्य सुविधाओं की जानकारी दी जाती है और वक्त रहते लोगों को नशा से दूर करने के उपाय किए जाते हैं। इस अवसर पर समाज कल्याण विभाग के संचालक रमेश शर्मा, अपर संचालक पंकज वर्मा सहित नशा मुक्ति अभियान से जुड़े विभिन्न विभागों के अधिकारी तथा सामाजिक संगठनों व स्वयंसेवी संस्थाओं के प्रतिनिधि उपस्थित थे।

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