SUPREME COURT ORDER : These instructions to the Central and State Governments…
रायपुर डेस्क। अगर सड़क पर घूम रहे आवारा मवेशियों की वजह से हादसा होता है, तो अब सरकारों को जिम्मेदारी तय करनी होगी। सुप्रीम कोर्ट ने इस गंभीर मुद्दे पर बड़ा रुख अपनाते हुए केंद्र और सभी राज्य सरकारों को हादसे के पीड़ितों के लिए मुआवजा देने का तंत्र विकसित करने के निर्देश दिए हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने साफ कहा कि सड़क पर खुले घूम रहे गाय, बैल और दूसरे पशु सिर्फ लोगों की जान के लिए ही नहीं, बल्कि खुद अपने लिए भी खतरा हैं। ऐसे हादसों को रोकने के लिए पशुओं के मालिकों की जवाबदेही भी तय होनी चाहिए।
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जस्टिस संजय करोल और जस्टिस एन. कोटिश्वर सिंह की पीठ ने सुनवाई के दौरान कहा कि यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि पालतू पशु दिन खत्म होने के बाद अपने निर्धारित स्थान पर वापस लौटें। यदि पशु सड़क पर खुले घूमते हैं और हादसे का कारण बनते हैं, तो इसके लिए जिम्मेदारी तय करना जरूरी है।
कोर्ट ने सरकारी आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि हर साल आवारा पशुओं से जुड़े सड़क हादसों में करीब 1,300 लोगों की मौत हो जाती है। ऐसे में केवल हादसे के बाद कार्रवाई नहीं, बल्कि पहले से रोकथाम के लिए भी प्रभावी व्यवस्था बनानी होगी।
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यह टिप्पणी 2007 के एक मामले की सुनवाई के दौरान आई। विजय नाम के युवक की सड़क पर टहलते समय एक आवारा सांड के हमले में मौत हो गई थी। इस मामले में मुआवजे को लेकर कानूनी विवाद सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा, जिसके बाद अदालत ने व्यापक दिशा-निर्देश जारी किए।
अब सभी की नजर इस बात पर है कि केंद्र और राज्य सरकारें सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बाद मुआवजा व्यवस्था और आवारा पशुओं पर नियंत्रण को लेकर क्या कदम उठाती हैं।
