GARE PELMA COAL MINE : Big order of Supreme Court, first public hearing then approval!
रायपुर। छत्तीसगढ़ की गारे पेलमा सेक्टर-II कोयला खदान को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने साफ कर दिया है कि नई पर्यावरण मंजूरी (EC) देने से पहले नई सार्वजनिक जनसुनवाई कराना अनिवार्य होगा। हालांकि, कोर्ट ने महागेन्को को राहत देते हुए फिलहाल खदान में चल रहे खनन कार्य पर रोक लगाने से इनकार कर दिया है।
मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि पुरानी जनसुनवाई की रिकॉर्डिंग या दस्तावेज देखकर नई मंजूरी नहीं दी जा सकती। अगर पर्यावरण मंजूरी दोबारा जारी करनी है, तो पूरी प्रक्रिया भी नए सिरे से करनी होगी।
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सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) के उस आदेश को भी खारिज कर दिया, जिसमें बिना नई जनसुनवाई के दी गई पर्यावरण मंजूरी को सही माना गया था। अब मामला दोबारा NGT के पास भेजा गया है, जहां 3 अगस्त से सुनवाई शुरू होगी और जनसुनवाई प्रक्रिया की निगरानी भी की जाएगी।
कोर्ट ने कहा कि “नए सिरे से” का मतलब सिर्फ पुराने रिकॉर्ड देखना नहीं, बल्कि पूरी जनसुनवाई प्रक्रिया दोबारा कराना है। यही कानून की मंशा भी है।
हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने यह भी माना कि परियोजना की कई जरूरी शर्तों का पहले ही काफी हद तक पालन हो चुका है। इसलिए केवल जनसुनवाई लंबित होने के आधार पर खनन गतिविधियां रोकना उचित नहीं होगा। यानी नई मंजूरी की प्रक्रिया पूरी होने तक खनन जारी रहेगा।
दरअसल, महागेन्को को जुलाई 2022 में इस परियोजना के लिए पर्यावरण मंजूरी मिली थी। बाद में NGT ने जनवरी 2024 में मंजूरी रद्द कर दोबारा प्रक्रिया पूरी करने का आदेश दिया था। लेकिन पर्यावरण मंत्रालय की विशेषज्ञ समिति ने बिना नई जनसुनवाई के ही अगस्त 2024 में फिर मंजूरी दे दी, जिसे अब सुप्रीम कोर्ट ने कानूनी रूप से गलत माना है।
अब इस पूरे मामले पर सभी की नजर NGT की अगली सुनवाई और नई जनसुनवाई प्रक्रिया पर रहेगी।
