ASIM MUNIR : पाकिस्तान में बड़ा सैन्य बदलाव …

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ASIM MUNIR : Major military change in Pakistan…

इस्लामाबाद, 9 नवंबर। पाकिस्तान ने अपने सैन्य ढांचे में ऐतिहासिक बदलाव की दिशा में कदम बढ़ा दिया है। आर्मी चीफ जनरल आसिम मुनीर को अब देश का पहला ‘चीफ ऑफ डिफेंस फोर्सेज (CDF)’ बनाने की तैयारी है। इसके लिए संविधान में 27वां संशोधन विधेयक सीनेट से पारित हो चुका है। यह पद भारत के चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) की तरह होगा, जिसके तहत थलसेना, नौसेना और वायुसेना की संयुक्त कमान एक ही प्रमुख के अधीन होगी।

छह महीने में दूसरा बड़ा प्रमोशन

जनरल आसिम मुनीर को यह छह महीनों में दूसरा बड़ा प्रमोशन मिलेगा। इससे पहले, इस साल मई में पाकिस्तान सरकार ने उन्हें फील्ड मार्शल का दर्जा दिया था, यह देश की सर्वोच्च सैन्य रैंक है। मुनीर से पहले 1959 में तानाशाह अयूब खान ने खुद को फील्ड मार्शल घोषित किया था।

एकीकृत कमांड सिस्टम की तैयारी

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, भारत-पाकिस्तान के बीच मई में हुई चार दिन की झड़प के बाद पाकिस्तान ने यह निर्णय लिया। इस दौरान सेना, नौसेना और वायुसेना के बीच बेहतर समन्वय की कमी सामने आई थी। अब नया कमांड सिस्टम तीनों सेनाओं को एकजुट करके तेजी से और प्रभावी जवाब देने में मदद करेगा।

संविधान के अनुच्छेद 243 में संशोधन

नए संशोधन में सेना से जुड़ी कई बड़ी व्यवस्थाओं में बदलाव किया गया है –

राष्ट्रपति अब प्रधानमंत्री की सलाह पर आर्मी चीफ और चीफ ऑफ डिफेंस फोर्सेज दोनों की नियुक्ति करेंगे।

मौजूदा थलसेना प्रमुख को ही CDF का पद भी दिया जाएगा।

नेशनल स्ट्रैटजिक कमांड का गठन होगा, जिसका नेतृत्व CDF करेंगे।

फील्ड मार्शल, एयर फोर्स मार्शल और एडमिरल ऑफ द फ्लीट जैसी आजीवन रैंक देने की अनुमति होगी।

मौजूदा जॉइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ कमेटी का पद 27 नवंबर 2025 के बाद समाप्त कर दिया जाएगा।

संविधान में अन्य बड़े बदलाव भी शामिल –

यह संशोधन सिर्फ सेना तक सीमित नहीं है। इसमें कई संवैधानिक और प्रशासनिक सुधार भी प्रस्तावित हैं –

संवैधानिक अदालत की स्थापना, जो संविधान से जुड़े मामलों की अलग सुनवाई करेगी।

हाई कोर्ट जजों की बहाली और तबादले की नई प्रक्रिया।

राज्यों को मिलने वाले राजस्व हिस्से में संशोधन की व्यवस्था।

शिक्षा और जनसंख्या नियोजन की शक्तियों को संघ (केंद्र) के अधीन लाना।

चुनाव आयोग की नियुक्तियों में आने वाली बाधाओं को खत्म करने का प्रावधान।

राज्यों के हिस्से के फंड में भी बदलाव संभव –

संशोधन में सबसे विवादास्पद प्रस्ताव राज्यों को मिलने वाली फंडिंग में लचीलापन से जुड़ा है। अब केंद्र सरकार जरूरत पड़ने पर राज्यों का हिस्सा घटा सकेगी। सिंध और बलूचिस्तान जैसे राज्य इस प्रस्ताव का कड़ा विरोध कर रहे हैं, उनका कहना है कि यह संघीय ढांचे और राज्यों के वित्तीय अधिकारों के खिलाफ है।

आगे की प्रक्रिया –

यह संशोधन अब पाकिस्तान की संसद के निचले सदन (नेशनल असेंबली) में भेजा गया है। यहां 14 नवंबर को इस पर वोटिंग होगी। अगर विधेयक को दो-तिहाई बहुमत मिल जाता है, तो इसे राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद लागू किया जाएगा।

 

 

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