SUPREME COURT : Decision on OBC creamy layer, why is IAS training stalled?
रायपुर। ओबीसी क्रीमीलेयर के नियमों पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद अब पुरानी भर्तियों को लेकर असमंजस बढ़ गया है। इसका असर आईएएस अधिकारियों की ट्रेनिंग और सेवा आवंटन पर भी पड़ने की बात सामने आई है। तय कार्यक्रम के मुताबिक ट्रेनिंग अगस्त के तीसरे सप्ताह में शुरू होनी थी, लेकिन मामला अभी स्पष्ट नहीं हुआ है।
केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट से मांगा स्पष्टीकरण
कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (DoPT) ने नोट जारी कर बताया कि सरकार चाहती है कि सुप्रीम कोर्ट स्पष्ट करे कि 11 मार्च के फैसले को किस तरह लागू किया जाए। केंद्र ने 24 अगस्त 2026 को इस संबंध में याचिका दाखिल की थी। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, 24 सितंबर को कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रखा था, जिस पर निर्णय लंबित है।
आय नहीं, पद और सामाजिक स्थिति भी अहम
11 मार्च के फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि ओबीसी क्रीमीलेयर तय करने के लिए केवल माता-पिता की आय को आधार नहीं बनाया जा सकता। उनके पद और सामाजिक स्थिति पर भी विचार करना होगा। कोर्ट ने सरकारी और निजी क्षेत्र के कर्मचारियों के बच्चों के साथ अलग-अलग व्यवहार को अनुचित भेदभाव माना था।
पुरानी भर्तियों पर भी पड़ सकता है असर
अगर फैसले का दायरा पुरानी भर्तियों तक बढ़ता है, तो पिछले वर्षों में क्रीमीलेयर मानकर आरक्षण से बाहर किए गए उम्मीदवार दोबारा विचार की मांग कर सकते हैं। इससे सेवा आवंटन, वरिष्ठता और मौजूदा अधिकारियों की सेवा शर्तों पर असर पड़ने की आशंका है।
इसका प्रभाव SSC, रेलवे, बैंक भर्ती और उच्च शिक्षण संस्थानों के पुराने मामलों पर भी पड़ सकता है। हालांकि, इन सभी पर फैसला किस तरह लागू होगा, यह सुप्रीम कोर्ट के स्पष्टीकरण पर निर्भर करेगा।
