नई दिल्ली, 01 नवम्बर 2025। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) रविवार को देश के अब तक के सबसे भारी संचार उपग्रह ‘सीएमएस-03’ को लॉन्च करने के लिए पूरी तरह तैयार है। यह ऐतिहासिक प्रक्षेपण आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से किया जाएगा।
लगभग 4,410 किलोग्राम वजन वाला यह उपग्रह भारतीय धरती से प्रक्षेपित होने वाला और जियोसिंक्रोनस ट्रांसफर ऑर्बिट (GTO) में स्थापित होने वाला सबसे भारी संचार उपग्रह होगा। इसे देश के सबसे शक्तिशाली रॉकेट लॉन्च व्हीकल मार्क-3 एम5 (LVM3-M5) के जरिए प्रक्षेपित किया जाएगा।
यह उपग्रह भारतीय नौसेना की कनेक्टिविटी को मजबूत करेगा और देश के दूरस्थ इलाकों में डिजिटल सेवाओं की पहुंच को बेहतर बनाएगा।
इस मिशन की सफलता भारत की अंतरिक्ष तकनीक को एक नई ऊंचाई पर ले जाएगी।
इसकी इसी क्षमता के लिए इसे ‘बाहुबली’ नाम दिया गया है। राकेट बूस्टर लिफ्ट आफ, लिक्विड प्रोपेलेंट कोर और क्रायोजेनिक (सी25) – तीन चरणों वाला यह राकेट इसरो को 4,000 किलोग्राम तक के भारी संचार उपग्रहों को कम लागत में जीटीओ में प्रक्षेपित करने में पूर्ण आत्मनिर्भरता प्रदान करता है। राकेट के किनारों पर स्थित दो एस200 ठोस राकेट बूस्टर लिफ्ट आफ के लिए आवश्यक थ्रस्ट प्रदान करते हैं। एस200 बूस्टर विक्रम साराभाई अंतरिक्ष केंद्र, तिरुअनंतपुरम में विकसित किए गए हैं।
