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माफियागढ़ में कृषि भूमि की खरीद फरोख्त किसान मुख्यमंत्री को नहीं दिख रही – भाजपा प्रवक्ता

 

रायपुर। छत्तीसगढ़ प्रदेश भाजपा प्रवक्ता नीलू शर्मा ने राजधानी रायपुर जिले के खरोरा क्षेत्र में जमीन दलालों द्वारा करीब हजार एकड़ कृषि भूमि का एग्रीमेंट किये जाने की खबर का हवाला देते हुए कहा है कि उद्योगों के लिए कृषि भूमि कब्जाने का यह गोरखधंधा राजनीतिक संरक्षण में हो रहा है। जमीन माफिया निजी और सरकारी जमीन पर कब्जा करने के साथ साथ अकेले रायपुर जिले में हजारों एकड़ कृषि भूमि का करार कर बैठे और सरकार सोती रही। पूरे छत्तीसगढ़ में यही माफिया तंत्र सक्रिय है। रायपुर से लेकर वनांचल तक खेल चल रहा है। बस्तर में आदिवासियों की जमीन कब्जाने पर संभागीय आयुक्त ने सख्ती दिखाई तो माफिया के इशारे पर उनकी ही बस्तर से छुट्टी हो गई। जो सरकार माफिया को औने पौने दाम में सरकारी जमीन की बंदरबांट कर रही हो, उसके राज में राजधानी जिले की हजार एकड़ काश्तकारी जमीन का सौदा साबित कर रहा है कि रायपुर को माफियापुर और छत्तीसगढ़ को अपराधगढ़ के साथ ही माफियागढ़ में बदल दिया गया है। कांग्रेस बताये कि यह जमीन किसके इशारे पर बटोरी जा रही है। कहीं इसके पीछे जीजाजी की जमीनखोर कंपनी का हाथ तो नहीं है? यह आशंका इसलिए भी है कि जमीन का ऐसा खेल पहले भी कांग्रेस शासित राज्यों में हो चुका है। कांग्रेस जवाब दे कि कृषि भूमि के इस बड़े पैमाने पर सौदे का राज क्या है? खुद को मुख्यमंत्री से पहले एक किसान होना बताने वाले आंख पर पट्टी क्यों बांधे हुए हैं?

प्रदेश भाजपा प्रवक्ता नीलू शर्मा ने कहा कि प्रदेश में कांग्रेस की सरकार बनने के पहले दिन से ही रेत माफिया से लेकर खेत माफिया तक हर तरह के माफिया राजनीतिक संरक्षण में खरपतवार की तरह उग आये हैं। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल झूठे वादों और फर्जी दावों की खेती कर रहे हैं। राजधानी रायपुर सहित पूरे प्रदेश में कृषि भूमि पर माफिया की गिद्धदृष्टि उजागर होने के बाद सरकार की खामोशी बता रही है कि छत्तीसगढ़ के किसान को किस प्रकार धोखेबाजी से किसके संरक्षण में लूटा जा रहा है।

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