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पीसीसी चीफ की अगुवाई में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने किया डीआरएम ऑफिस का घेराव

रायपुर। रेलवे ने छत्तीसगढ़ से गुजरने वाली 23 यात्री ट्रेनों को एक महीने के लिए रद्द कर दिया है। इस रेलबंदी से प्रदेश की राजनीति भड़क गई है। कांग्रेस ने इसका तीखा विरोध शुरू किया है। मंगलवार को कांग्रेस ने प्रदेश अध्यक्ष मोहन मरकाम की अगुवाई में डीआरएम कार्यालय का घेराव कर दिया। इस दौरान कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने जमकर नारेबाजी की। करीब आधे घंटे तक चले नारेबाजी के बाद प्रदेश अध्यक्ष ने डीआरएम को ज्ञापन सौंपा है। ज्ञापन में ट्रेन जल्द शूरू करने की मांग की गई है।

प्रदेश कांग्रेस संचार विभाग के अध्यक्ष सुशील आनंद शुक्ला ने बताया था, राज्य से 23 ट्रेनों के परिचालन रद्द किए जाने से एक बार फिर से यह साबित हो गया कि नरेन्द्र मोदी से देश नहीं संभल रहा है। वे न तो कोल इंडिया बचा पा रहे, न रेलवे। सुधार कार्य और मेंटेनेंस के नाम पर ट्रेनों को रद्द करना एक बहाना है। दरअसल मोदी सरकार ने ट्रेनों को परिचालन कोयला संकट के कारण रद्द किया है। स्वयं रायपुर के सांसद सुनील सोनी ने यह स्वीकार किया है कि यदि ट्रेनों को रद्द नहीं किया गया तो 7 से 8 राज्यों में बिजली संकट के कारण ब्लैक आउट की स्थिति पैदा हो जाएगी।

सुशील आनंद शुक्ला ने कहा, यदि ट्रेन मेंटेनेंस के कारण ट्रेनों को रद्द किया गया है तो फिर उसी रेलवे ट्रेक पर मालगाड़ियों का परिचालन कैसे किया जा रहा है। न सिर्फ मालगाड़ियों का परिचालन किया जा रहा उनकी संख्या दुगुनी भी कर दी गयी है।

अब तक 109 ट्रेनों को बंद करने का आरोप

प्रदेश कांग्रेस संचार विभाग के अध्यक्ष सुशील आनंद शुक्ला ने कहा, रेलवे ने अब तक राज्य की 109 ट्रेनों को बंद कर दिया है। 87 ट्रेनों को पिछले कोरोना के नाम से दो साल से बंद किया गया। 22 ट्रेनों को अब रद्द कर दिया गया है। ट्रेनों के बंद किए जाने से रेलवे से जुड़ कर जीविकोपार्जन करने वाले लोग भी परेशान है।

मुख्यमंत्री भूपेश बघेल रेलवे के इस निर्णय का विरोध कर चुके हैं। उन्होंने कहा, रेलवे को इस फैसले पर पुनर्विचार करना चाहिए। एक दिन पहले उन्होंने कहा कि वे इस मुद्दे पर रेल मंत्री से भी बात करेंगे। मुख्यमंत्री के अपर मुख्य सचिव सुब्रत साहू ने रेलवे बोर्ड को पत्र लिखकर रेलगाड़ियों को बंद करने पर आपत्ति जताई है।

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