चाय पर चर्चा! 

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Discussion over Tea!

पत्रकार दीपक तिवारी

पूरे जिले में इन दिनों शिक्षा विभाग को लेकर चाय दुकानों, पान ठेलों और चौक-चौराहों में एक ही चर्चा जोरों पर है आखिर 218 करोड़ रुपये के मामले में केवल BEO संजय जायसवाल पर ही कार्रवाई क्यों? लोग सवाल उठा रहे हैं कि जब पिछले तीन-चार वर्षों से कैश बुक मेंटेन ही नहीं हो रही थी, तो उसकी जिम्मेदारी केवल वर्तमान अधिकारी पर कैसे डाल दी गई

चर्चा यह भी है कि BEO संजय जायसवाल ने कई बार इस गंभीर अनियमितता को लेकर जिला शिक्षा अधिकारी को पत्र लिखा था। बताया जा रहा है कि उन्होंने दो बार लिखित रूप से अवगत कराया कि वर्षों से कैश बुक सही तरीके से संधारित नहीं हो रही है और संबंधित बाबू द्वारा मामले को गंभीरता से नहीं लिया जा रहा। इसके बावजूद समय रहते ठोस कार्रवाई नहीं हुई।

चाय पर बैठे लोगों का कहना है कि यदि समय पर जांच होती और जिम्मेदार कर्मचारियों पर कार्रवाई होती, तो आज इतनी बड़ी स्थिति पैदा ही नहीं होती। लोगों के बीच यह भी चर्चा है कि संजय जायसवाल से पहले जो अधिकारी इस पद पर रहे, उनकी भूमिका की जांच क्यों नहीं हुई? आखिर वर्षों तक कैश बुक मेंटेन नहीं होने का जिम्मेदार कौन है?

सबसे ज्यादा सवाल जांच प्रक्रिया को लेकर उठ रहे हैं। लोगों का कहना है कि जिस अधिकारी का खुद पहले उस कार्यालय से संबंध रहा, उसी को जांच की जिम्मेदारी दे दी गई। अब आम चर्चा यह है कि जांच निष्पक्ष हुई या जानबूझकर कई पहलुओं को नजरअंदाज किया गया?

चाय पर चर्चा में लोग यह भी कह रहे हैं कि यदि बाबू द्वारा कैश बुक मेंटेन नहीं की जा रही थी और इसकी जानकारी लगातार ऊपर भेजी जा रही थी, तो फिर संबंधित बाबू और पूर्व अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई क्यों नहीं हुई? केवल एक अधिकारी को निलंबित कर देने से क्या पूरे मामले की सच्चाई सामने आ जाएगी?

जिले में यह चर्चा भी गर्म है कि कहीं अंदरूनी राजनीति, विरोधियों की नाराजगी या किसी षड्यंत्र के कारण तो संजय जायसवाल पर कार्रवाई नहीं की गई? क्योंकि कई लोगों का कहना है कि जांच में ऐसा कोई प्रत्यक्ष तथ्य सामने नहीं आया, जिससे सीधे तौर पर उन पर करोड़ों की गड़बड़ी का आरोप सिद्ध हो सके।

अब लोगों की मांग है कि पूरे मामले की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच होनी चाहिए, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि असली जिम्मेदार कौन है कैश बुक वर्षों तक मेंटेन न करने वाले कर्मचारी, पुराने अधिकारी, या फिर केवल वर्तमान BEO को ही आसान निशाना बनाया गया।

फिलहाल जिले में एक ही सवाल गूंज रहा है

“क्या शिक्षा विभाग की बड़ी लापरवाही का ठीकरा केवल संजय जायसवाल के सिर फोड़ा जा रहा है?

 

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