छत्तीसगढ़ विधानसभा के बजट सत्र में गूंजे कस्टोडियल डेथ और रेव पार्टी के मुद्दे

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Issues of custodial death and rave party resonated in the budget session of Chhattisgarh Assembly

रायपुर। छत्तीसगढ़ विधानसभा के बजट सत्र के चौथे दिन सदन में कई अहम मुद्दों पर तीखी बहस देखने को मिली। कस्टोडियल डेथ, जेलों में क्षमता से अधिक कैदियों की स्थिति, रायपुर के फॉर्महाउस में रेव पार्टियों की कार्रवाई और प्रदेश के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल मेकाहारा की बदहाल व्यवस्था जैसे विषयों पर विपक्ष ने सरकार को घेरा।

 

प्रश्नकाल के दौरान पूर्व मुख्यमंत्री और पाटन विधायक भूपेश बघेल ने राज्य में बढ़ते कस्टोडियल डेथ के मामलों को उठाया। उन्होंने जेलों में स्वीकृत क्षमता से अधिक कैदियों के बंद होने का मुद्दा भी सदन में रखा और सरकार से जवाब मांगा। इन मुद्दों पर भी घमासान

 

सदन में 108 एंबुलेंस सेवा के टेंडर प्रक्रिया, तकनीकी संस्थानों से पासआउट युवाओं को रोजगार, मुख्यमंत्री ग्राम सड़क योजना के अधूरे कार्य, नक्सल पुनर्वास नीति और शराब दुकानों व आहता के आवंटन के मापदंड जैसे विषयों पर भी सरकार को घेरने की तैयारी रही।

 

  • विधायक भावना बोहरा ने मुख्यमंत्री ग्राम सड़क योजना के अधूरे निर्माण कार्यों पर सवाल उठाए।

 

  • विधायक विक्रम उसेंडी ने नक्सल पुनर्वास नीति की वर्तमान स्थिति पर जानकारी मांगी।

 

  • विधायक शकुंतला पोर्ते ने तकनीकी शिक्षित युवाओं को रोजगार उपलब्ध कराने के मुद्दे को प्रमुखता से उठाया।

 

  • विधायक धरमलाल कौशिक ने 108 एंबुलेंस सेवा के टेंडर प्रक्रिया में पारदर्शिता को लेकर सवाल किए।रेव पार्टी और कानून-व्यवस्था पर सवाल

 

रायपुर के फॉर्महाउस में कथित अवैध गतिविधियों और रेव पार्टियों के आयोजन का मुद्दा विधायक चातुरी नंद ने उठाया। चूंकि मामला गृह विभाग से जुड़ा है, इसलिए गृहमंत्री से इस पर जवाब मांगा गया। सवाल यह रहा कि ऐसे आयोजनों पर निगरानी और कार्रवाई की क्या व्यवस्था है।

शराब दुकानों के आवंटन पर ध्यानाकर्षण

 

रायपुर दक्षिण विधायक सुनील सोनी ने ध्यानाकर्षण प्रस्ताव के जरिए शराब दुकानों और आहता के आवंटन में स्पष्ट मापदंड तय नहीं किए जाने का मुद्दा उठाया। उन्होंने आबकारी मंत्री से पूछा कि दुकान खोलने के लिए क्या मानक निर्धारित हैं और क्या प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित की गई है।

 

वहीं, विधायक अंबिका मरकाम ने पारधी समुदाय के लोगों के जाति प्रमाण पत्र नहीं बनने का मुद्दा उठाते हुए आदिम जाति एवं अनुसूचित जनजाति विकास विभाग से जवाब मांगा।बजट पर आज से चर्चा

 

प्रश्नकाल और ध्यानाकर्षण प्रस्तावों के बाद 24 फरवरी को पेश बजट पर चर्चा की शुरुआत हुई। विधायकों को अपने-अपने क्षेत्रों से जुड़े मुद्दों को बजट से जोड़कर अपनी बात रखने का अवसर मिला।

 

कुल मिलाकर, विधानसभा का चौथा दिन राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप, तीखे सवाल-जवाब और महत्वपूर्ण जनहित मुद्दों की गूंज के बीच बीता। कानून-व्यवस्था, स्वास्थ्य सेवाएं और बुनियादी सुविधाओं को लेकर सरकार को सदन में कड़ा सामना करना पड़ा।

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