रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की अध्यक्षता में आज कलेक्टर–डीएफओ कॉन्फ्रेंस का आयोजन किया गया, जिसमें राज्य के हरित विकास और वन आधारित अर्थव्यवस्था को सशक्त करने के लिए महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ की पहचान हरियाली और प्राकृतिक संपदा से है, इसलिए वन संसाधनों के सतत उपयोग और ग्राम स्तर पर आर्थिक सशक्तिकरण के लिए वन धन केंद्रों की संख्या बढ़ाने की आवश्यकता है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि हर जिले में स्थानीय वन उपज के आधार पर नए वन धन केंद्र स्थापित किए जाएं, ताकि वनवासियों को रोजगार और आय के स्थायी अवसर मिल सकें।
उन्होंने यह भी कहा कि राज्य में औषधीय पौधों की खेती, वन संरक्षण, जल स्रोतों के पुनर्जीवन और सामुदायिक वन प्रबंधन की दिशा में ठोस कार्ययोजना तैयार की जाए। मुख्यमंत्री ने जिलेवार प्रगति की समीक्षा करते हुए कहा कि पर्यावरण संरक्षण और आर्थिक विकास का संतुलन ही “हरित विकास” की दिशा तय करेगा।
कॉन्फ्रेंस में प्रमुख सचिव वन विभाग, सभी जिलों के कलेक्टर, डीएफओ सहित संबंधित अधिकारी उपस्थित रहे। बैठक में वनों से जुड़ी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन, स्थानीय समुदायों की भागीदारी और हरित मिशन के लक्ष्यों पर विस्तृत चर्चा हुई।
मुख्यमंत्री ने कहा — “वन संपदा हमारे विकास की धरोहर है, इसे संरक्षित रखते हुए ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाना हमारी प्राथमिकता है।”

