तिरछी नजर : किसने पहुंचाई चिट्ठी

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पूर्व सीएम डॉ रमन सिंह ने पीएम आवास योजना पर विधानसभा में कई नए खुलासे किए। पहला खुलासा यह था कि इस योजना पर सवाल लगने से पंचायत मंत्री टीएस सिंहदेव व्यथित थे और योजना का क्रियान्वयन नहीं हो पाने के कारण विभाग से इस्तीफा दे दिया। यह सवाल उठ रहा है कि क्या इस्तीफा देने से पहले सिंहदेव ने रमन सिंह को अपना दर्द बयां किया था?

रमन सिंह ने साढ़े 3 साल में पहली बार सरकार पर आरोप लगाने से पहले प्रमाण सदन के सामने रखे। उन्होंने उन चिट्ठियों को सदन के पटल पर रखा जिसे केंद्रीय मंत्री और विभाग के आला अफसरों ने राज्य सरकार को लिखा था। अब यह बताने की जरूरत नहीं है कि पत्र रमन सिंह के पास कैसे पहुंची? कई लोग कह रहे हैं कि चि_ी सिंहदेव के ऑफिस से लीक हुई है। एक चर्चा यह भी है कि केन्द्रीय मंत्री के स्टाफ में छत्तीसगढ़ कैडर के आईएएस अफसर भी हैं जो कि रमन सिंह के स्टाफ में भी रहे हैं। उनके मार्फत सारी चिट्ठी रमन सिंह तक पहुंची हैं। एक बात साफ हो रहा है कि दोनों में से एक ने रमन सिंह को चिट्ठीयॉ उपलब्ध कराई है। कुछ भी हो, सरकार के भीतर इसकी खूब चर्चा हो रही है।

 

भरी बैठक में लेन देन का टेप बजा..

कांग्रेस के प्रभारी पीएल पुनिया के सामने एक अजीब वाक्या हुआ जब वो पार्टी के विभिन्न विभागों और प्रकोष्ठों के अध्यक्षों की बैठक ले रहे थे तो एक ने अपने विभाग के पदाधिकारियों की सूची जारी नहीं होने का मुद्दा उठाया। पुनिया इस पर कुछ कहते, इससे पहले ही एक प्रमुख पदाधिकारी ने बताया कि अध्यक्ष के खिलाफ पदाधिकारियों की नियुक्ति के लिए लेन देन की शिकायत सामने आई है।

अध्यक्ष ने पदाधिकारी के कथन को खारिज किया, तो पदाधिकारी ने पुनिया के सामने ही लेन देन की चर्चा का आडियो सुना दिया। इस पर विभाग के अध्यक्ष ने अपना बचाव करते हुए कह दिया कि वो पदाधिकारी के कहे अनुसार ही कर रहे हैं। यह सुनकर पुनिया हैरान रह गए। विवाद बढ़ता देख पुनिया ने दोनों को फटकारा और भरी बैठक में लेन देन का टेप सुनाने पर नाराजगी जताई। हालाकि पुनिया के हस्तक्षेप के बाद मामला शांत हो गया लेकिन देर सबेर इसके बढऩे के आसार दिख रहे हैं।

 

तबादलों से नाराजगी

प्रदेश में हाल में एक साथ 19 कलेक्टरों के तबादले हुए। तबादलों को लेकर विशेष कर आईएएस बिरादरी में असंतोष दिख रहा है। तबादलों के लिए कोई स्पष्ट नीति सामने नहीं आई है। चार कलेक्टर ही ऐसे थे जिन्हें दो साल हुए थे बाकी तो साल भर में इधर से उधर कर दिए गए। प्रभावशाली मंत्रियों तक को भी सूची जारी होने के बाद पता चला। इसी तरह एसपी भी जिस तेजी से बदले गए हैं, उसकी भी काफी चर्चा हो रही है। इस तरह के तबादलों से जिलों में कामकाज पर असर पड़ता ही है।

सात साल बाद वही पोस्टिंग

तबादलों में रमेश शर्मा भी प्रभावित हुए। वो संचालक भू-अभिलेख बनाए गए। उन्हें कवर्धा कलेक्टर रहते दो साल हो गए थे लेकिन जिस संचालक भू-अभिलेख पद पर उनकी पोस्टिंग हुई है उस पर 7 साल पहले काम कर चुके हैं। तब उस समय रमेश शर्मा एडिशनल कलेक्टर के पद पर थे। रमेश शर्मा को राजस्व अभिलेखों का दुरूस्ती करण और कम्प्यूटराईजेशन का श्रेय दिया जाता हैं। यही नहीं, रमेश शर्मा से पहले संचालक भू-अभिलेख पद पर जनक पाठक की पोस्टिंग हुई थी जिन्हें महीने भर के भीतर बदल दिया गया।

विधायक पति की करतूत

कांग्रेस की एक महिला विधायक के पति ने अफसरों के नाक में दम कर रखा है । वे आरटीआई के तहत आवेदन लगा कर जानकारी मांग रहे हैं । अफसर विधायक को फोन लगाते हैं, तो फोन पति रिसीव करते हैं । थोड़े समय में ही विधायक पति की ख्याति चारों तरफ फैल गई है । चर्चा है कि कुछ स्थानीय नेता भी सीएम से शिकायत करने वाले हैं । पार्टी अब विधायक पति पर लगाम लगा पाती है या नहीं, यह आगे पता चलेगा।

 

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