RAIPUR NEW CAPITAL DEMAND: Demand for making Raipur the new capital of the country intensifies, detailed proposal sent to PM
रायपुर। छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर को भारत की नई राजधानी घोषित करने की मांग एक बार फिर जोर पकड़ने लगी है। इसी कड़ी में सामाजिक कार्यकर्ता विकास विजय बजाज ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक विस्तृत पत्र भेजकर रायपुर को राजधानी बनाने का अनुरोध किया है। इस पत्र की प्रतिलिपि राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, मुख्य न्यायाधीश, गृहमंत्री और कई केंद्र व राज्य स्तरीय वरिष्ठ पदाधिकारियों को भी भेजी गई है।
दिल्ली प्रदूषण पर चिंता, नई राजधानी की जरूरत पर जोर
पत्र में कहा गया है कि दिल्ली का बढ़ता वायु प्रदूषण अब स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बन चुका है। बच्चों के आउटडोर खेल बंद, वायु गुणवत्ता में लगातार गिरावट और न्यायपालिका तक की चिंता का हवाला देते हुए उन्होंने लिखा कि राजधानी जैसी संवेदनशील जगह का विकल्प ढूंढना अब समय की मांग है।
उन्होंने कहा कि “देश को एक ऐसी राजधानी की जरूरत है, जहां विश्वस्तरीय अधोसंरचना के साथ-साथ स्वच्छ हवा और स्वस्थ वातावरण उपलब्ध हो।”
रायपुर के पक्ष में रखे गए प्रमुख तर्क
पत्र में रायपुर को राजधानी बनाने के कई आधार प्रस्तुत किए गए –
मध्य भारत में स्थित होने से बेहतर कनेक्टिविटी
भूकंप रहित क्षेत्र, जो इसे सुरक्षित बनाता है
प्राकृतिक जंगल और हरित वातावरण, जो राजधानी के लिए प्रदूषण-मुक्त माहौल सुनिश्चित करेगा
रायपुर-भिलाई-दुर्ग ट्राइसिटी मॉडल में राजधानी संचालित करने की विशाल क्षमता
सीमा क्षेत्रों से दूर, जिससे राष्ट्रीय सुरक्षा मजबूत
वीआईपी और अंतरराष्ट्रीय राजनीतिक गतिविधियों के लिए सुरक्षित और शांत वातावरण
छत्तीसगढ़ के महान विभूतियों का उल्लेख
बजाज ने पत्र में छत्तीसगढ़ के शहीदों और महान नेताओं –
वीर नारायण सिंह, गुरु घासीदास, मिनी माता, पं. सुंदरलाल शर्मा, अजीत जोगी, विद्याचरण शुक्ल, दाऊ चंदूलाल चंद्राकर सहित कई हस्तियों का उल्लेख करते हुए लिखा कि “उनके आदर्शों से प्रेरित होकर हम रायपुर को देश की राजधानी बनाने का स्वप्न देखते हैं।”
प्रधानमंत्री से सकारात्मक पहल की अपील
बजाज ने प्रधानमंत्री को “दूरदर्शी, संकल्पवान और स्वप्नदृष्टा” बताते हुए अनुरोध किया कि वे इस प्रस्ताव पर गंभीरता से विचार करें और देश के भविष्य को देखते हुए रायपुर को राजधानी बनाने की दिशा में पहल करें।
पत्र के अंत में बजाज ने स्वयं को “आम भारतीय और सामान्य छत्तीसगढ़िया” बताते हुए कहा कि यह मांग केवल उनकी नहीं, बल्कि लाखों नागरिकों की भावना है।

