NCERT NEW BOOK 2026 : Uproar over inclusion of Vedas and Emergency in the syllabus
रायपुर। नौवीं की नई एनसीईआरटी किताब ने देश की राजनीति में नया बवाल खड़ा कर दिया है। अब छात्र एक तरफ ऋग्वेद, यजुर्वेद, सामवेद और अथर्ववेद पढ़ेंगे, तो दूसरी ओर 1975 की इमरजेंसी, प्रेस सेंसरशिप और नागरिक अधिकारों पर लगे प्रतिबंधों का भी अध्ययन करेंगे।
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एनसीईआरटी की नई पुस्तक अंडरस्टेंडिंग सोसाइटी: इंडिया एंड बियान्ड में भारतीय परंपरा, वैदिक ज्ञान और पंचमहाभूतों की अवधारणा को विस्तार से शामिल किया गया है। सबसे ज्यादा चर्चा इमरजेंसी वाले अध्याय को लेकर हो रही है, जिसमें 25 जून 1975 के घटनाक्रम को विस्तार से समझाया गया है।
इसी मुद्दे पर कांग्रेस और भाजपा आमने-सामने आ गई हैं। कांग्रेस नेताओं का आरोप है कि इतिहास को एक खास नजरिए से पेश किया जा रहा है। मध्य प्रदेश के पूर्व मंत्री जयवर्धन सिंह ने इसे बच्चों की शिक्षा में राजनीति बताया, जबकि छत्तीसगढ़ प्रभारी सचिन पायलट ने भी इस बदलाव पर सवाल उठाए हैं।
दूसरी तरफ मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने फैसले का खुलकर समर्थन किया है। उन्होंने 25 जून 1975 को लोकतंत्र का काला अध्याय बताते हुए कहा कि नई पीढ़ी को उस दौर की सच्चाई जाननी चाहिए। मुख्यमंत्री ने लोकतंत्र सेनानियों के सम्मान और उनके संरक्षण के लिए राज्य सरकार के प्रयासों का भी उल्लेख किया।
अब शिक्षा का यह नया पाठ्यक्रम सिर्फ कक्षा तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि राजनीतिक बहस का बड़ा मुद्दा बन चुका है।
