MOHAN BHAGWAT SPEECH : धर्म का अर्थ समाज को जोड़ना, केवल पूजा-पाठ नहीं – मोहन भागवत

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MOHAN BHAGWAT SPEECH : Religion means to unite the society, not just worship – Mohan Bhagwat

बिलासपुर, 31 अगस्त। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने शनिवार को बिलासपुर प्रवास के दौरान समाज में एकता, समरसता और धर्म की सही व्याख्या पर जोर दिया। सिम्स ऑडिटोरियम में आयोजित लोकहितकारी काशीनाथ स्मारिका विमोचन समारोह में उन्होंने स्व. काशीनाथ गोरे की स्मृति में तैयार स्मारिका और डॉ. प्रफुल्ल शर्मा की पुस्तक का लोकार्पण किया। इस अवसर पर विधानसभा अध्यक्ष रमन सिंह सहित कई गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।

डॉ. भागवत ने स्व. काशीनाथ गोरे को समर्पित स्वयंसेवक बताते हुए कहा कि उनका जीवन समाज सेवा और संगठन के प्रति पूर्ण समर्पण का प्रतीक था। उन्होंने कहा कि काशीनाथ जी जैसे स्वयंसेवकों के त्याग और मेहनत ने ही आरएसएस को मजबूत बनाया है।

अपने संबोधन में भागवत ने धर्म की नई परिभाषा प्रस्तुत की। उन्होंने कहा, “धर्म का मतलब केवल पूजा-पाठ नहीं है, बल्कि समाज को एक परिवार की तरह जोड़ना और विविधताओं में सामंजस्य लाना है।” उन्होंने हिंदू समाज से आह्वान किया कि वे अपने आचरण से विश्व के सामने भाईचारे और एकता का उदाहरण पेश करें।

उन्होंने यह भी कहा कि संघ आज 100 वर्ष पूरे कर एक बड़े संगठन के रूप में समाज की आस्था का केंद्र बना है। इसकी मजबूती का कारण वे स्वयंसेवक हैं, जिन्होंने विपरीत परिस्थितियों में भी संघ का विस्तार किया। भागवत ने युवाओं से समाज सेवा में आगे आने और देश के विकास में सक्रिय योगदान की अपील की।

समारोह में बड़ी संख्या में स्वयंसेवकों और नागरिकों ने उत्साहपूर्वक हिस्सा लिया। कार्यक्रम के अंत में डॉ. प्रफुल्ल शर्मा ने अपनी पुस्तक के विमोचन के लिए सरसंघचालक का आभार व्यक्त किया। बताया जा रहा है कि इस दौरे ने छत्तीसगढ़ की राजनीति में भी हलचल पैदा कर दी है। भागवत ने प्रवास के दौरान स्थानीय नेताओं और स्वयंसेवकों के साथ अनौपचारिक चर्चा में संगठन की भावी योजनाओं पर विचार-विमर्श भी किया।

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

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