KHABAR CHALISA तिरछी नजर : दीपक झा और मयंक गुर्जर..

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KHABAR CHALISA Skew glance: Deepak Jha and Mayank Gurjar..

डीजीपी-आईजी कांफ्रेंस में हर राज्य से तीन अफसर शामिल हुए। इनमें डीजीपी के अलावा एक आईजी और एक एसपी स्तर के अफसर हैं।

छत्तीसगढ़ से डीजीपी अरूण देव गौतम के अलावा सरगुजा आईजी दीपक झा व बीजापुर बटालियन में कमांडेन्ट मयंक गुर्जर को कांफ्रेंस में शामिल होने का मौका मिला।

दीपक झा ने राजनांदगांव में पुलिस परीक्षा घोटाले की निष्पक्ष जांच की और घोटाले के लिए जिम्मेदार लोगों पर सख्त कार्रवाई की। इससे सरकार की साख बच गई। यही नहीं, मयंक गुर्जर ने नक्सल फ्रंट पर अच्छा काम किया है। अब दीपक झा रायपुर पुलिस कमिश्नर के रेस में शामिल हो गए हैं, जो कि नए साल में अस्तित्व में आएगा। मयंक को अच्छी पोस्टिंग मिलने की उम्मीद है।

ओपी के खिलाफ गुस्सा

जमीन का गाइडलाइन दरों में वृद्धि के बाद से वित्त मंत्री ओपी चौधरी को भारी आलोचना झेलनी पड़ रही है। उन्हें भला-बुरा कहने वालों में विपक्ष ही नहीं बल्कि उनकी अपनी पार्टी के लोग भी हैं।

बेमेतरा जिले के भाजपा के एक नगर पालिका पदाधिकारी ने उनकी खुलकर आलोचना की है। हालांकि चौधरी बेपरवाह हैं और वो मानकर चल रहे हैं कि लोगों की नाराजगी धीरे धीरे शांत हो जाएगी। मगर ऐसा होता नहीं दिख रहा है। ज्यादातर जनप्रतिनिधि जमीन के कारोबार से प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से जुड़े हैं।

गाइडलाइन दर में भारी बढ़ोतरी से जमीन के कारोबार पर असर पड़ने की संभावना है। स्वाभाविक है कि गुस्सा चौधरी जी पर उतरेगा ही।

शराब घोटाला और होलोग्राम

चर्चित शराब घोटाले में होलोग्राम सप्लाई करने वाले प्रिज्म कंपनी के इस सरकार में भी होलोग्राम की सप्लाई करने की खबर है। होलोग्राम कंपनी मालिकों के खिलाफ प्रकरण दर्ज होने के बाद भी बकाया भुगतान किया गया।

कथित नकली होलोग्राम सप्लाई को लेकर खूब छापेमारी हुई, कई लोग पकड़े गए, जांच पड़ताल चली रही है। फिर भी कांग्रेस सरकार में सप्लाई करने वाले को इस सरकार में किसका संरक्षण है, यह राजनीति गलियारे में चर्चा का विषय बना हुआ है।

शराब के भ्रष्टाचार के सिस्टम को जानने वाले कई महारथी अभी भी मजे कर रहे हैं। इसका हल्ला भी जोरदार मचने के बाद भी कार्यवाही नहीं होना इस कहावत को चरितार्थ करता है कि हाथी के दांत दिखाने के और खाने के और होते हैं।

स्वास्थ्य महकमे में लीपापोती

हाल में हुए प्रशासनिक फेरबदल की मंत्रालय जोरदार चर्चा है। खासकर स्वास्थ्य विभाग में काम करने वाले दोनों महिला आईएएस डॉ प्रियंका शुक्ला और शिखा राजपूत तिवारी को अचानक हटाए जाने की समीक्षा हो रही है।
बताते हैं कि मंत्रीजी के निर्देश के बाद भी डां प्रियंका शुक्ला बर्खास्त एनआरएचएम कर्मियों की वापसी के लिए तैयार नहीं थीं। हालांकि उनका काम अच्छा रहा है। इसलिए उनका विभाग परिवर्तन कर स्कूल शिक्षा में समग्र और पाठ्य-पुस्तक निगम की अहम जिम्मेदारी दी गई है।

दूसरी तरफ, स्वास्थ्य सचिव अमित कटारिया की विभाग में एकतरफा चल रही है। स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल भी स्वास्थ्य सचिव से खुश नहीं है। मगर वो ज्यादा कुछ करने की स्थिति में नहीं है। इससे परे दुर्ग जिले के एक निजी मेडिकल कॉलेज के खिलाफ भी सीबीआई जांच चल रही है। जिसे लेकर विभाग के लोग परेशान हैं।

बृजमोहन की सक्रियता चर्चा में

कोरबा दौरे के दौरान पूर्व मंत्री बृजमोहन अग्रवाल ने भाजपा के वरिष्ठ नेता पूर्व मंत्री ननकीराम कंवर से भेट कर कुशलक्षेम पूछा है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह की राजधानी रायपुर में उपस्थिति के दौरान दोनों वरिष्ठ नेताओं की मुलाकात की काफी चर्चा हो रही है। रिश्ते निभाने में माहिर बृजमोहन, पूर्व महापौर एजाज ढेबर के घर भी पिछले दिनों मुलाकात करने के लिए गए थे। एजाज की माता का कुछ दिन पहले ही देहांत हुआ है। बृजमोहन के जाने के बाद नेता प्रतिपक्ष डॉ चरणदास महंत ढेबर परिवार के यहां शोक प्रकट करने गए।

पार्टी में दरकिनार करने की कोशिशों के बीच बृजमोहन की इस तरह से मुलाकातों की काफी प्रशंसा भी हो रही हैं।

दिसंबर में अमित शाह फिर आएंगे बस्तर

केन्द्रीय गृहमंत्री अमित शाह के काम करने के तौर तरीके से अफसर और नेता कायल रहते है। बस्तर ओलंपिक के समापन अवसर पर राज्य सरकार अमित शाह को आमंत्रित करना चाहता है। इसकी जिम्मेदारी उपमुख्यमंत्री- खेल मंत्री अरूण साव को सौंपी गई थी।

अरूण साव ने फोन कर अमित शाह से समय मांगा है। अमित शाह ने साव से कार्यक्रम का डिटेल मांगा था। राज्य सरकार खेल गतिविधियों की जानकारी भेजने से पहले ही तिथि और समय मिल गया।

अगले माह दिसंबर में अमित शाह फिर बस्तर आएंगे। लोगों से मिलकर बस्तर के विकास सहित अन्य गतिविधियों को समझेंगे।

काम कम… बदलाव ज़्यादा?

छत्तीसगढ़ के मंत्री आख़िर अपने स्टाफ से चाहते क्या हैं। इतनी जल्दी तो कोई घर के परदे नहीं बदलता जितनी जल्दी जल्दी ये अपने ओएसडी या पीए बदल रहे हैं।
अब टंकराम वर्मा जी को ही ले लीजिए पिछले महीने ही उन्होंने अपने ओएसडी गौतम सिंह को हटाया और इस हफ़्ते दुर्गेश वर्मा की छुट्टी कर दी।

नए नए मंत्री बने गजेंद्र यादव ने पीए युवराज देशमुख को हटाया तो राजेश अग्रवाल ने एक महीने में ही ओएसडी आशीष वर्मा को हटा दिया। 8 वीं पास को पीए बनाने के लिए अलग लगे रहे।

वही गुरु खुशवंत साहेब ने भी अपने स्टाफ में बदलाव कर दिया। राम विचार नेताम ने भी अपने स्टाफ में फेरबदल किया। अब मंत्रीगण स्टाफ के काम से खुश नहीं है या दाम से।

 

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