Is Padgha village under the shadow of terrorism or the burden of infamy? Questions raised on NIA’s action
मुंबई/ठाणे। महाराष्ट्र के ठाणे ज़िले के भिवंडी तालुका स्थित पडघा गांव एक बार फिर आतंकी गतिविधियों के शक के घेरे में है। महाराष्ट्र ATS की 250 अधिकारियों की टीम ने यहां 22 ठिकानों पर छापेमारी की। इस कार्रवाई में कई संदिग्धों को हिरासत में लिया गया और ISIS व SIMI जैसे प्रतिबंधित संगठनों से जुड़ाव के आरोप लगाए गए। लेकिन स्थानीय लोगों का कहना है – “हम अपराधी नहीं, पीड़ित हैं।”
‘आतंकी नेटवर्क’ का आरोप –
ATS और NIA को खुफिया जानकारी मिली थी कि पडघा गांव को ‘मुक्त क्षेत्र’ और ‘अल-शाम’ के रूप में घोषित कर ISIS की विचारधारा फैलाने का प्रयास किया जा रहा है। इस कार्रवाई में साकिब नाचन का घर भी खंगाला गया – जिसे महाराष्ट्र ISIS मॉड्यूल का प्रमुख माना जाता है।
पडघा पर शक की निगाहें नई नहीं हैं। 2002-03 के मुंबई ट्रेन धमाकों के समय भी इसी गांव के कुछ लोगों को दोषी ठहराया गया था। लेकिन अब ग्रामीण पूछ रहे हैं – “क्या कुछ लोगों के गुनाह की सज़ा पूरे गांव को मिलेगी?”
NIA की बरामदगी और ‘बयाथ’ की बात –
दिसंबर 2023 की NIA रेड में हथियार, ISIS झंडे, 68 लाख रुपये नकद और संदिग्ध दस्तावेज मिले थे। आरोप है कि साकिब नाचन मुस्लिम युवाओं को ISIS की विचारधारा से जोड़ता था, और उन्हें ‘बयाथ’ दिलवाता था, यानी खलीफा के प्रति वफादारी की शपथ।
गांव की दलील : “हमें बदनाम किया जा रहा”
लेकिन ग्रामीणों का दावा है कि NIA सिर्फ एक पक्ष रख रही है।
रमीजा नाचन जैसे माता-पिता अपने बेटों की गिरफ्तारी से सदमे में हैं। “हमारे पास वकील तक के पैसे नहीं हैं,” रमीजा कहती हैं।
अबुबकर कुन्नाथपीडिकल ने बताया कि उनके बेटे मुनज़िर के खिलाफ कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है – उल्टा वह पुलिस स्टेशन में इंटरनेट वायरिंग का ठेकेदार था।
रविष खोत जैसे स्थानीय लोग बताते हैं कि उनके गांव का नाम सुनकर लोगों को नौकरियों और शादी के प्रस्तावों से हाथ धोना पड़ रहा है।
“क्या सिर्फ एक परिवार के कारण पूरा गांव दोषी है?”, वे सवाल करते हैं।
इतिहास की गवाही, जो कोई नहीं सुन रहा –
गांववालों का कहना है कि पडघा का नाम स्वतंत्रता संग्राम में दर्ज है। महिलाएं स्वदेशी आंदोलन के दौरान अंग्रेज़ी सामान जलाने सड़कों पर उतरी थीं। आज वही गांव आतंक का अड्डा कहकर बदनाम किया जा रहा है।
न्याय बनाम सुरक्षा – क्या संतुलन बन पाएगा?
भारत जैसे देश में जहां आतंकी खतरे से सतर्कता ज़रूरी है, वहीं यह भी जरूरी है कि किसी निर्दोष को निशाना न बनाया जाए।
गांववालों ने कानूनी लड़ाई लड़ने के लिए वकील नियुक्त किया है। सवाल यह है कि क्या NIA के पास सबूत हैं या यह सिर्फ संदेह की सतह पर तैरती कार्रवाई है?
सबसे बड़ा सवाल –
“क्या आतंकी जाल सच में पडघा को लपेटे में ले चुका है, या यह गांव सिर्फ बदनामी का बोझ उठा रहा है?”
