राज्यपाल अनुसुईया उइके का नाम राष्ट्रपति पद के लिए प्रमुखता से आगे बढ़ा

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नई दिल्ली। राष्ट्रपति चुनाव के लिए नामांकन प्रक्रिया चल रही है। 29 जून को पर्चा भरने की आखिरी तारीख है। इस बीच सरकार और विपक्ष की ओर से राष्ट्रपति प्रत्याशियों के नामों पर मंथन शुरू हो चुका है। राष्ट्रपति चुनाव के उम्मीदवार को लेकर विपक्ष की तरफ से तो कई नामों की चर्चा हो रही है, लेकिन किसी नाम पर सहमति नहीं बन पा रही है। विपक्ष की ओर से कई नेता राष्ट्रपति पद का प्रत्याशी बनने से साफतौर पर इनकार कर चुके हैं, जबकि सत्ता पक्ष ने अब तक अपने पत्ते नहीं खोले हैं। आनंदी बेन पटेल,अनुसुईया उइके और द्रौपदी मुर्मू का नाम प्रमुखता से चल रहा है।
भाजपा में महामहिम बनाने की रेस में महिला, मुस्लिम, दलित या दक्षिण भारत की किसी हस्ती के नाम पर विचार किया जा रहा है, जिससे 2022-23 में होने वाले विधानसभा चुनावों और 2024 के लोकसभा चुनावों को साधने में आसानी हो सके। यह देखना दिलचस्प होगा कि जिन नामों पर चर्चा हो रही है, उनमें से कोई एक नाम सामने आता है या हर बार की तरह इस बार भी पार्टी कोई नया नाम लेकर सामने आती है।लोकसभा की 543 सीटों में से 47 सीट एसी श्रेणी के लिए आरक्षित है। 60 से अधिक सीटों पर आदिवासी समुदाय का प्रभाव है। मध्य प्रदेश, गुजरात, झारखंड, राजस्थान, छत्तीसगढ़ में बड़ी संख्या में आदिवासी वोटर निर्णायक स्थिति में हैं। ऐसे में आदिवासी नाम पर भी चर्चा चल रही है।
महिला वोट बैंक को साधने की भाजपा की कोशिश जारी है। बताया जा रहा है कि महिलाओं के नाम पर सबसे तेजी से विचार किया जा रहा है। इसमें यूपी की राज्यपाल आनंदी बेन पटेल शामिल हैं। आनंदी बेन पीएम नरेंद्र मोदी की करीबी मानी जाती हैं।
आनंदी बेन के अलावा पूर्व राज्यपाल द्रौपदी मुर्मू, छत्तीसगढ़ की राज्यपाल अनुसुइया उइके भी इस रेस में शामिल बताई जा रही हैं। इन दोनों में से किसी एक को राष्ट्रपति बनाने की स्थिति में भाजपा एक तीर से दो निशाने लगा सकती है। पहला यह कि इससे आदिवासी समाज को साधने में आसानी होगी और दूसरा महिलाओं में भी मैसेज जाएगा।
अनुसइया उइके मूल रूप से छिंदवाड़ा की हैं और 1985 से मध्य प्रदेश से राजनीति में सक्रिय हैं। उन्होंने दमुआ से विधायक का चुनाव जीता था। वह बीजेपी की राज्यसभा सांसद भी रह चुकी हैं। राजनीति में आने से पहले वह छिंदवाड़ा के शासकीय महाविद्यालय में तीन साल तक इकोनॉमिक्स की लेक्चरर भी रही हैं।झारखंड की नौंवी राज्यपाल द्रौपदी मुर्मू ओडिशा के रायरंगपुर से विधायक रह चुकी हैं। वह पहली ओडिया नेता हैं जिन्हें राज्यपाल बनाया गया। इससे पहले बीजेपी-बीजेडी गठबंधन सरकार में साल 2002 से 2004 तक वह मंत्री भी रहीं।

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