CHHATTISGARH : Repeatedly asking for borrowed money does not amount to incitement to suicide – High Court
रायपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने एक अहम फैसले में साफ कर दिया है कि किसी को उधार दिए गए पैसे वापस मांगना, बार-बार फोन करना या कानूनी कार्रवाई की चेतावनी देना अपने आप में आत्महत्या के लिए उकसाना नहीं माना जा सकता।
धमतरी के 12 साल पुराने चर्चित सरपंच सुसाइड केस में कोर्ट ने ठेकेदार अशोक कुमार वाधवानी को बड़ी राहत देते हुए 7 साल की सजा रद्द कर दी और दोषमुक्त करार दिया।
मामला ग्राम बलियारा के तत्कालीन सरपंच बलराम मंडावी की आत्महत्या से जुड़ा था। सुसाइड नोट में ठेकेदार का नाम आने के बाद परिजनों ने आरोप लगाया था कि पैसे के लिए लगातार दबाव बनाने से उन्होंने यह कदम उठाया।
हालांकि सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने कहा कि कर्ज देने वाले का अपनी रकम वापस मांगना उसका वैध अधिकार है। केवल बार-बार संपर्क करना या कानूनी कार्रवाई की बात करना आत्महत्या के लिए उकसाने का सबूत नहीं माना जा सकता।
कोर्ट ने यह भी पाया कि मृतक बैंक के भारी कर्ज, ट्रैक्टर जब्ती और आर्थिक संकट से भी जूझ रहा था, जो मानसिक तनाव की बड़ी वजह हो सकती है। साथ ही एससी-एसटी एक्ट के आरोपों को भी साक्ष्यों के अभाव में खारिज कर दिया गया।
इस फैसले के बाद अदालत ने आरोपी की 7 साल की सजा रद्द कर दी और मृतक पक्ष की सजा बढ़ाने वाली अपील भी खारिज कर दी।
