CHHATTISGARH BJP INFIGHTING : बृजमोहन अग्रवाल vs अपनी ही सरकार

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CHHATTISGARH BJP INFIGHTING : Brijmohan Agarwal vs his own government

रायपुर। छत्तीसगढ़ में भाजपा सरकार बने अभी दो साल ही हुए हैं और पार्टी के भीतर अब तक का सबसे बड़ा, खुला टकराव सामने आ गया है। रायपुर सांसद और भाजपा के दिग्गज नेता बृजमोहन अग्रवाल ने अपनी ही सरकार को भ्रष्टाचार के गंभीर आरोपों के घेरे में खड़ा कर दिया है। मामला 15 करोड़ रुपए के उस टेंडर से जुड़ा है, जिसमें आरोप है कि काम पहले करा लिया गया और बाद में टेंडर जारी किया गया।

इस पूरे प्रकरण में बृजमोहन अग्रवाल ने अपनी ही सरकार के खिलाफ बिलासपुर हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटा दिया है। विवाद का केंद्र बना है भारत स्काउट्स एंड गाइड्स की राष्ट्रीय रोवर–रेंजर जंबूरी, जो 9 जनवरी से बालोद जिले में प्रस्तावित है।

विवाद तब शुरू हुआ जब मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के अनुमोदन से स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव को राज्य स्काउट–गाइड परिषद का पदेन अध्यक्ष नियुक्त कर दिया गया। इसी दौरान परिषद से जुड़े 15 करोड़ रुपए के टेंडर पर सवाल उठे। आरोप है कि जंबूरी से जुड़े कई काम बिना टेंडर कराए गए और बाद में औपचारिकता निभाने के लिए टेंडर जारी किया गया।

सबसे गंभीर आरोप यह है कि राज्य शासन से जंबूरी के लिए मिली 10 करोड़ रुपए की राशि स्काउट–गाइड के खाते में जमा कराने के बजाय बालोद जिले के जिला शिक्षा अधिकारी के खाते में डाल दी गई। अधिकारियों के मुताबिक जेम पोर्टल के जरिए टेंट, खानपान और अन्य व्यवस्थाएं पहले ही कर दी गई थीं।

बृजमोहन अग्रवाल, जो राज्य स्काउट–गाइड परिषद के निर्वाचित अध्यक्ष हैं, ने इन अनियमितताओं का हवाला देते हुए जंबूरी को स्थगित करने का फैसला लिया। लेकिन सरकार इसके उलट आयोजन कराने पर अड़ी नजर आई। इसके बाद गजेंद्र यादव की पदेन अध्यक्ष के तौर पर नियुक्ति हुई और राज्य आयुक्त की ओर से बयान आया कि जंबूरी स्थगित नहीं होगी।

हालात इतने उलझ गए कि खुद मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की एक सोशल मीडिया पोस्ट ने नया विवाद खड़ा कर दिया। उन्होंने देर रात जंबूरी को लेकर एक पोस्ट की, लेकिन कुछ ही देर में उसे डिलीट कर दिया। इसे लेकर राजनीतिक गलियारों में असमंजस और अंदरूनी खींचतान की चर्चाएं तेज हो गईं।

इस पूरे विवाद पर बृजमोहन अग्रवाल ने साफ कहा कि वे भारत स्काउट्स एंड गाइड्स के निर्वाचित अध्यक्ष हैं और संगठन के संविधान के मुताबिक उनका कार्यकाल पांच साल का है। बिना उनके इस्तीफे के उन्हें हटाया नहीं जा सकता।

भाजपा की इस अंदरूनी लड़ाई को कांग्रेस ने बड़ा हथियार बना लिया है। कांग्रेस ने भाजपा पर गुटबाजी और भ्रष्टाचार के आरोप लगाए हैं और पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच की मांग की है। कांग्रेस ने EOW में शिकायत दर्ज कराई है और राज्यपाल से हस्तक्षेप की मांग भी की है।

उधर स्काउट–गाइड्स के राज्य आयुक्त ने सभी आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि आयोजन तय कार्यक्रम के अनुसार होगा। बालोद के आयोजन स्थल पर देशभर से करीब 5 हजार रेंजर–रोवर पहुंच चुके हैं और आने वाले दिनों में यह संख्या और बढ़ने वाली है।

फिलहाल पूरे मामले की निगाहें हाई कोर्ट पर टिकी हैं। अदालत के फैसले से यह तय होगा कि जंबूरी का आयोजन होगा या नहीं और गजेंद्र यादव की पदेन अध्यक्षता वैध मानी जाएगी या नहीं। राजनीतिक तौर पर यह मामला भाजपा सरकार के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है, क्योंकि पहली बार पार्टी का एक वरिष्ठ सांसद खुलेआम अपनी ही सरकार पर भ्रष्टाचार के आरोप लगा रहा है।

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

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