BILASPUR: Rain exposes Bilaspur’s dilapidated infrastructure—who is ultimately responsible?
बिलासपुर। 17 जुलाई 2026 को हुई मूसलाधार बारिश ने न्यायधानी बिलासपुर को पूरी तरह अस्त-व्यस्त कर दिया। कुछ ही घंटों की बारिश ने शहर के विकास के दावों की पोल खोल दी। प्रमुख सड़कें नदी बन गईं, कॉलोनियां जलमग्न हो गईं, हजारों घरों में पानी घुस गया, व्यापारिक प्रतिष्ठानों में लाखों रुपये का नुकसान हुआ और कई परिवारों का वर्षों की मेहनत से जोड़ा गया सामान पानी में बह गया। कई क्षेत्रों में लोगों को अपने घर छोड़कर सुरक्षित स्थानों पर शरण लेने के लिए मजबूर होना पड़ा।
बारिश के बाद शासन-प्रशासन, जनप्रतिनिधि और अधिकारी प्रभावित क्षेत्रों का दौरा कर राहत और सहायता का भरोसा दे रहे हैं। लेकिन इस बार जनता का गुस्सा पहले से कहीं अधिक है। लोगों का कहना है कि आपदा के बाद सहानुभूति जताना आसान है, लेकिन सवाल यह है कि आपदा आने से पहले क्या तैयारी की गई थी?
हर वर्ष मानसून में बिलासपुर के डूबने की तस्वीरें सामने आती हैं। इसके बावजूद प्रशासन हर बार बेहतर व्यवस्था का दावा करता है। इस वर्ष हुई भारी तबाही के बाद शहरवासियों का सवाल है कि यदि मौसम विभाग ने पहले ही भारी बारिश की चेतावनी दी थी, तो नालों की सफाई, जल निकासी व्यवस्था और आपदा प्रबंधन के लिए क्या ठोस इंतजाम किए गए थे?
जनता यह भी पूछ रही है कि शहर में सीवरेज और ड्रेनेज परियोजनाओं के नाम पर करोड़ों रुपये खर्च किए गए। यदि इतना बड़ा बजट खर्च हुआ, तो फिर हर बारिश में शहर तालाब क्यों बन जाता है? क्या ये विकास कार्य केवल कागजों तक सीमित हैं या वास्तव में धरातल पर भी दिखाई देते हैं?
शहर के नागरिकों का कहना है कि यदि समय रहते नालों की सफाई, जल निकासी की व्यवस्था और संवेदनशील क्षेत्रों में पूर्व तैयारी की गई होती, तो इतनी बड़ी जन-धन की हानि नहीं होती। लोगों का आरोप है कि हर साल वही वादे किए जाते हैं, लेकिन स्थायी समाधान आज तक नहीं निकाला गया।
अब शहर की जनता प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से जवाब मांग रही है कि हर वर्ष एक जैसी स्थिति बनने के बावजूद आखिर जिम्मेदारी किसकी तय होगी? नागरिकों का कहना है कि केवल सर्वे, मुआवजे की घोषणा और सांत्वना से समस्या का समाधान नहीं होगा। आवश्यकता है जवाबदेही तय करने की और ऐसी स्थायी व्यवस्था बनाने की जिससे भविष्य में बिलासपुर को इस तरह की तबाही का सामना न करना पड़े।
जनता की प्रमुख मांगें:
- जलभराव के कारणों की उच्च स्तरीय जांच हो।
- सीवरेज और ड्रेनेज परियोजनाओं का सामाजिक एवं तकनीकी ऑडिट कराया जाए।
- जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाए।
- मानसून से पहले स्थायी जल निकासी व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।
- प्रभावित परिवारों और व्यापारियों को शीघ्र एवं उचित मुआवजा दिया जाए।
“जनता का कहना है कि उन्हें केवल आश्वासन नहीं, बल्कि ऐसा बिलासपुर चाहिए जहां हर बारिश के साथ लोगों के सपने और घर पानी में न बह जाएं।”
