CG RAKHI: Sisters tied the sacred thread on the wrists of their imprisoned brothers; tears welled up on Rakhi!
CG RAKHI: रक्षाबंधन के मौके पर बिलासपुर केंद्रीय जेल में सुबह से ही भावनाओं का सैलाब उमड़ पड़ा। सुबह करीब 7 बजे से बहनों को अपने बंदी भाइयों से मिलने के लिए जेल के अंदर प्रवेश दिया गया। हाथों में राखी, थाली और मिठाई लिए बहनें घंटों इंतजार करती रहीं।
किसी को भाई की कलाई पर राखी बांधने की जल्दी थी, तो किसी की आंखें सिर्फ उस चेहरे को देखने के लिए बेचैन थीं, जिसे लंबे समय से सामने से नहीं देखा था।जैसे ही मुलाकात का सिलसिला शुरू हुआ, जेल परिसर में कई ऐसे दृश्य सामने आए, जिन्हें देखकर वहां मौजूद लोग भी भावुक हो उठे।
लंबे समय बाद सामने आए भाई-बहन एक-दूसरे को देखते ही गले लग गए। कुछ देर तक दोनों के बीच कोई शब्द नहीं था, सिर्फ आंखों से आंसू बहते रहे। बहनें भाइयों का चेहरा हाथों में लेकर उन्हें देखती रहीं और भाई भी अपनी बहनों को चुप कराने की कोशिश करते रहे। किसी परिवार के लिए यह मुलाकात खुशी थी, तो किसी के लिए बीते समय का दर्द फिर से सामने आने जैसा।
इसके बाद बहनों ने भाइयों की कलाई पर राखी बांधी, माथे पर तिलक लगाया और मिठाई खिलाई। राखी बांधते वक्त कई बहनों की आंखें नम थीं। उन्होंने भाइयों से कहा कि आज कलाई पर बंधा यह धागा सिर्फ रक्षाबंधन की रस्म नहीं है, बल्कि परिवार और रिश्तों को फिर से जोड़ने का वादा है। एक बहन ने भाई से कहा—अब ऐसी गलती कभी मत करना, जिसके कारण हमें तुमसे मिलने के लिए जेल की चौखट तक आना पड़े। बहन की यह बात सुनकर भाई भी भावुक हो गए और उन्होंने जिंदगी में दोबारा ऐसी गलती नहीं करने का संकल्प लिया।भाई को राखी बांधकर बस यही कहा है कि अब कभी ऐसी गलती मत करना।
जेल प्रशासन की ओर से रक्षाबंधन को लेकर विशेष व्यवस्था की गई थी। इस बार भी सुबह 7 बजे से शाम 4 बजे तक बहनों को जेल के अंदर जाकर भाइयों से मिलने और राखी बांधने का अवसर दिया गया।
प्रवेश से पहले सुरक्षा जांच की गई और जेल परिसर में मुलाकात की पूरी व्यवस्था निगरानी के बीच संचालित हुई। सुरक्षा के साथ-साथ इस बात का भी ध्यान रखा गया कि बहनों को अपने भाइयों से रक्षाबंधन के इस खास दिन पर कुछ समय भावनात्मक रूप से जुड़ने का अवसर मिल सके।
