दोजरी कवर्धा : ग्राम दोजरी में सरकारी भूमि पर अवैध रूप से कब्जा कर बनाए गए कमर्शियल कॉम्प्लेक्स का मामला लगातार तूल पकड़ता जा रहा है। इस प्रकरण में राजस्व विभाग के एक अधिकारी, प्रभावशाली कब्जाधारी और पुलिस की भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, ग्राम निवासी एवं प्रार्थी द्वारा सबसे पहले तहसील कार्यालय में सरकारी ज़मीन पर हो रहे अवैध निर्माण की लिखित शिकायत की गई थी। आरोप है कि तहसीलदार द्वारा शिकायत को गंभीरता से लेने के बजाय अवैध कब्जाधारी से सांठगांठ कर शिकायत को निरस्त कर दिया गया।
न्याय न मिलने पर प्रार्थी ने एसडीएम कार्यालय में शिकायत दर्ज कराई। मामले की जांच के बाद एसडीएम द्वारा अवैध निर्माण को ध्वस्त करने का आदेश जारी किया गया, जिससे यह स्पष्ट होता है कि निर्माण नियम विरुद्ध और सरकारी भूमि पर किया गया था।
हालांकि, एसडीएम के आदेश के बाद भी अवैध कब्जाधारी, जो कि क्षेत्र में प्रभावशाली बताया जा रहा है, के खिलाफ अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई। उल्टा आरोप है कि प्रार्थी को ही झूठे मामलों में फँसाया गया और पुलिस द्वारा उसके साथ मारपीट व दुर्व्यवहार किया गया।
प्रार्थी का कहना है कि उसने केवल सरकारी संपत्ति को बचाने और प्रशासन का ध्यान अवैध कब्जे की ओर दिलाने का प्रयास किया, लेकिन इसके बदले उसे शारीरिक और मानसिक प्रताड़ना झेलनी पड़ी। स्थानीय लोगों का भी कहना है कि प्रभावशाली लोगों के दबाव में कार्रवाई का रुख पीड़ित के विरुद्ध मोड़ दिया गया।
ग्रामीणों ने इस पूरे मामले की निष्पक्ष उच्चस्तरीय जांच, दोषी अधिकारियों एवं पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई तथा प्रार्थी को न्याय और सुरक्षा देने की मांग की है।
अब देखना यह है कि प्रशासन इस गंभीर मामले में पारदर्शिता दिखाते हुए क्या ठोस कदम उठाता है या फिर एक बार फिर प्रभाव और सत्ता के आगे सच दबा दिया जाएगा।

