HIGH COURT VERDICT : No right to ask for post of choice in compassionate appointment
बिलासपुर. बिलासपुर हाईकोर्ट ने अनुकंपा नियुक्ति को लेकर बड़ा और साफ संदेश दिया है। कोर्ट ने कहा कि सिर्फ ज्यादा पढ़े-लिखे होने से कोई व्यक्ति अनुकंपा नियुक्ति में अपनी पसंद का या ऊंचे पद का दावा नहीं कर सकता।
सक्ती की मीनाक्षी चंद्रा ने चपरासी की जगह शिक्षक पद पर नियुक्ति की मांग करते हुए हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। उनके पति हीरा राम चंद्रा शासकीय स्कूल में प्रधान पाठक थे और सेवाकाल के दौरान उनका निधन हो गया था।
महिला के पास B.Ed. की डिग्री और CG-TET की पात्रता होने के बावजूद जिला शिक्षा अधिकारी ने उन्हें वर्ग-4 यानी चपरासी पद पर अनुकंपा नियुक्ति दी थी। इसी आदेश को चुनौती देते हुए उन्होंने शिक्षक पद की मांग की थी।
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राज्य सरकार ने कोर्ट में बताया कि अनुकंपा कोटे के तहत शिक्षक वर्ग-3 की कोई सीट खाली नहीं थी। इसलिए परिवार को तत्काल आर्थिक सहायता देने के उद्देश्य से उपलब्ध पद पर नियुक्ति दी गई, जो पूरी तरह नियमों के अनुरूप है।
जस्टिस बीडी गुरु ने अपने फैसले में कहा कि अनुकंपा नियुक्ति का मकसद परिवार को आर्थिक संकट से उबारना है, न कि योग्यता के आधार पर बेहतर सरकारी नौकरी उपलब्ध कराना। अगर उच्च पद की रिक्ति नहीं है तो उम्मीदवार उस पद पर कानूनी दावा नहीं कर सकता।
कोर्ट ने जिला शिक्षा अधिकारी के आदेश को सही ठहराते हुए याचिका खारिज कर दी।
