CG WOMEN HARASSMENT : Allegations of harassment against the officer are true, then how did he get a new posting amid suspension?
रायपुर। छत्तीसगढ़ के महिला एवं बाल विकास विभाग से सामने आई जांच रिपोर्ट ने सरकारी दफ्तरों में महिलाओं की सुरक्षा को लेकर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। दंतेवाड़ा के तत्कालीन जिला कार्यक्रम अधिकारी (DPO) वरुण नागेश पर दो महिला कर्मचारियों ने कार्यस्थल पर लैंगिक उत्पीड़न के गंभीर आरोप लगाए, जिन्हें आंतरिक शिकायत समिति ने प्रथम दृष्टया सही माना।
पहली शिकायत में एक संविदा महिला कर्मचारी ने आरोप लगाया कि अनुबंध बढ़ाने के नाम पर उसे केबिन में बुलाकर आपत्तिजनक प्रस्ताव दिया गया। महिला ने विरोध किया और रोते हुए बाहर निकल गई। शिकायत में यह भी कहा गया कि अधिकारी पहले से उसकी शारीरिक बनावट पर टिप्पणियां करते थे और बार-बार निजी बहानों से बुलाते थे।
दूसरी महिला अधिकारी ने आरोप लगाया कि मार्च क्लोजिंग का काम बताकर रविवार को कार्यालय बुलाया गया और रात रुकने के लिए दबाव बनाया गया। महिला के इनकार के बाद कथित तौर पर उसके पारिवारिक हालात का जिक्र कर मानसिक दबाव बनाने की कोशिश की गई।
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जांच समिति ने सिर्फ शिकायतें नहीं सुनीं, बल्कि गवाहों के बयान और कॉल डिटेल रिकॉर्ड भी खंगाले। रिपोर्ट में कहा गया कि उपलब्ध साक्ष्य दोनों शिकायतों की पुष्टि करते हैं और मामला कार्यस्थल पर महिलाओं के लैंगिक उत्पीड़न अधिनियम, 2013 के दायरे में आता है।
हालांकि, वरुण नागेश ने सभी आरोपों से इनकार किया और कहा कि उन्होंने केवल विभागीय काम के सिलसिले में कर्मचारियों को बुलाया था। लेकिन समिति ने उनके तर्कों को स्वीकार नहीं किया और रिपोर्ट के बाद उन्हें निलंबित कर दिया गया।
सबसे बड़ा सवाल अब यही उठ रहा है कि जिन आरोपों को समिति ने सही माना, उसी अधिकारी को निलंबन के दौरान पहले जगदलपुर और बाद में रायपुर में नई जिम्मेदारी कैसे मिल गई? क्या कार्रवाई सिर्फ कागजों तक सीमित रह गई या सिस्टम ने किसी और रास्ते का चुनाव किया?
