CG NEWS: Grand convention of statehood movement activists; discussions held on the state’s development and its current plight.
CG NEWS: 31 अक्टूबर और 1 नवंबर का दिन छत्तीसगढ़ के 3 करोड़ छत्तीसगढ़ियों के लिए उत्सव और गौरव का अवसर लेकर आया। छत्तीसगढ़ राज्य आंदोलनकारी एवं छत्तीसगढ़ समाज पार्टी के पुरोधाओं ने एक मंच पर एकत्रित होकर छत्तीसगढ़ के विकास और बदहाली के मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की।
कार्यक्रम की शुरुआत तीन सत्रों में हुई। प्रथम सत्र में छत्तीसगढ़ महतारी की पूजा-अर्चना एवं माल्यार्पण के साथ राज्य आंदोलन के पुरोधाओं ने टिकरापारा स्थित साहू भवन में एकत्रित होकर 27वां राज्योत्सव मनाया। इस अवसर पर छत्तीसगढ़ महतारी के 26 वर्षों के सफर, राज्य की उपलब्धियों और वर्तमान परिस्थितियों पर चर्चा की गई।
इसके पश्चात पदयात्रा निकाली गई। पदयात्रा का शुभारंभ टिकरापारा स्थित साहू भवन से हुआ, जिसका समापन हांडीपारा स्थित छत्तीसगढ़ी भवन में हुआ।
पदयात्रा में आदिवासी संस्कृति की मनमोहक झलक देखने को मिली। इसमें विभिन्न प्रकार के मांदरी नृत्य, सैला नृत्य, रीलो नृत्य, मुड़िया नृत्य एवं ककसार नृत्य की प्रस्तुतियां दी गईं। छत्तीसगढ़ राज्य के कोने-कोने से पहुंचे राज्य आंदोलनकारियों ने छत्तीसगढ़ महतारी के जयकारे लगाते हुए पदयात्रा में उत्साहपूर्वक भाग लिया।
राजधानी रायपुर में राज्य आंदोलनकारियों का विशाल हुजूम एकत्रित हुआ। सभी ने एक स्वर में छत्तीसगढ़ियों के शोषण के खिलाफ तथा अपने हक और अधिकारों की रक्षा के लिए संघर्ष करने का संकल्प लिया।
कार्यक्रम का समापन हांडीपारा स्थित छत्तीसगढ़ी भवन में सांस्कृतिक कार्यक्रम के साथ हुआ। इस अवसर पर महादेव हिरवानी के लोककला मंच ‘चंदैनी गोंदा’ द्वारा सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दी गईं।
राज्योत्सव में प्रमुख रूप से अनिल दुबे, दाऊ जी पी चंद्राकर, लाला राम वर्मा, दीनदयाल वर्मा, परसराम ध्रुव, चेतन देवांगन, महेंद्र कौशिक, टेनसिंग पटेल, भुवन लाल पटेल, मुनु बाई पटेल, राधा बाई सिन्हा, वेगेंद्र सोनबेर एवं योगेंद्र यादव सहित अनेक गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
इस आयोजन में छत्तीसगढ़ समाज पार्टी (छसपा), छत्तीसगढ़ विश्वविद्यालय महाविद्यालय संघ, छत्तीसगढ़ संयुक्त किसान मोर्चा, छत्तीसगढ़ मजदूर संघ सहित विभिन्न संगठनों के प्रतिनिधियों ने भागीदारी निभाई।
इस आयोजन ने छत्तीसगढ़ की अस्मिता, संस्कृति, अधिकारों और राज्य आंदोलन की मूल भावना को एक बार फिर बुलंद करने का संदेश दिया।
