Jantar-Mantar Protest: SC takes a tough stance on CJP’s protest!
JANTAR-MANTAR PROTEST: दिल्ली के जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रदर्शन में पुलिस की कार्रवाई, नेताओं और वकीलों को हिरासत में लेने, मेट्रो व सड़कों पर पाबंदियां लगाने और फोन जैमर के इस्तेमाल मामलों में सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई ।
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने दिल्ली में लोगों की आवाजाही बहाल करने, बैरिकेड हटाने और मेट्रो सेवाएं सामान्य समय-सारणी के अनुसार चलाने को लेकर निर्देश दिए। साथ ही, वकीलों को उनके पेशेवर काम में बाधा नहीं पहुंचाने की बात भी कही गई।
सुनवाई के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने कहा कि लोगों को शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने और संविधान के अनुच्छेद 19(1)(a) के तहत मिले अभिव्यक्ति के अधिकार का इस्तेमाल करने की अनुमति मिलनी चाहिए।
उन्होंने दलील दी कि प्रदर्शन के लिए निर्धारित जगह होने के बावजूद लोगों को वहां जाने से रोका जा रहा है। इस पर सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि प्रदर्शन की अनुमति लेने के लिए आवेदन नहीं किया गया था।
जस्टिस बागची ने कहा कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन करना नागरिकों का अधिकार है, लेकिन इसका तरीका कानून के दायरे में होना चाहिए। अदालत यह भी देखेगी कि पुलिस की ओर से लगाई गई पाबंदियां संविधान के अनुच्छेद 19(2) के अनुरूप हैं या नहीं।
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जब तक सार्वजनिक व्यवस्था से जुड़ी कोई ऐसी स्थिति नहीं बनती, जिसके कारण प्रतिबंध जरूरी हों, तब तक मेट्रो सेवाएं सामान्य समय-सारणी के अनुसार चलनी चाहिए। साथ ही, शहर में लोगों की आवाजाही सामान्य करने पर जोर दिया गया।
