राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू 22 अक्टूबर को छत्तीसगढ़ दौरे पर आ रही हैं। रायपुर उत्तर के विधायक पुरंदर मिश्रा ने राष्ट्रपति के दौरे के दौरान इंडोर स्टेडियम में नवाखाई का कार्यक्रम तय करवा लिया है। इसमें करीब पांच हजार लोगों के शामिल होने की संभावना है। बताते हैं कि पुरंदर मिश्रा ने इस कार्यक्रम के लिए सीधे राष्ट्रपति से चर्चा की थी। दूसरी ओर, इंडोर स्टेडियम को शहर जिला मंत्री तुषार चोपड़ा ने पहले गरबा कार्यक्रम के लिए बुक कराया था, लेकिन राष्ट्रपति के कार्यक्रम के चलते गरबा आयोजन निरस्त करना पड़ा। अब इस घटनाक्रम को पुरंदर मिश्रा के राजनीतिक दमखम से जोड़कर देखा जा रहा है।
स्मृति ने दिखाए तेवर
प्रदेश भाजपा की नवनियुक्त प्रभारी स्मृति ईरानी का दौरा कार्यक्रम अभी तय नहीं हुआ है, लेकिन उन्होंने पार्टी के कार्यक्रमों की निगरानी शुरू कर दी है। बताते हैं कि पिछले दिनों एक प्रदेश महामंत्री को उनकी नाराजगी झेलनी पड़ी। हुआ यूं कि प्रदेश महामंत्री ने स्मृति ईरानी को अपना परिचय देने के बाद सीधे सेवा संकल्प अभियान का ब्योरा देना शुरू कर दिया। इस पर स्मृति ने उन्हें टोकते हुए स्पष्ट कर दिया कि वह प्रदेश अध्यक्ष से रिपोर्ट लेंगी।
स्मृति ईरानी ने सेवा संकल्प अभियान की तैयारियों की जानकारी ऑनलाइन बैठक में भी ली है। बताया जा रहा है कि वह नवरात्र के दौरान प्रदेश के दौरे पर आकर कोर ग्रुप की बैठक लेंगी। इस बैठक में वह पार्टी की कार्यशैली और संगठनात्मक गतिविधियों को लेकर अपना रुख स्पष्ट कर सकती हैं। उनके शुरुआती तेवरों से ही प्रदेश भाजपा में यह संदेश जाने लगा है कि संगठन के कामकाज पर उनकी नजर रहेगी।
काम करने से क्यों हाथ खड़े कर रहे अधिकारी?
बदले राजनीतिक हालात के बाद छत्तीसगढ़ में प्रमुख पदों पर बैठे कई अधिकारी प्रतिनियुक्ति पर दिल्ली जाने के लिए फिर सक्रिय हो गए हैं। इनमें से कई अधिकारियों ने विधिवत आवेदन भी कर दिया है, लेकिन राज्य सरकार की ओर से अब तक सहमति नहीं मिली है। फिलहाल सरकार भी अधिकारियों को दिल्ली जाने की अनुमति देने के मूड में नहीं दिख रही है। राजनीतिक परिस्थितियों को भांपने में माहिर कुछ अफसर अब सरकार के प्रमुख एजेंडे से जुड़े कामों सहित अन्य मामलों को लटकाने और भटकाने में रुचि ले रहे हैं। साथ ही अपने मन की पीड़ा भी जाहिर कर रहे हैं। अब देखना होगा कि इन अधिकारियों को आने वाले दिनों में दिल्ली जाने की अनुमति मिलती है या उन्हें प्रदेश में ही रहकर काम करना पड़ेगा।
महंत के बयान का मर्म समझें
नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत आम तौर पर कम बोलते हैं, लेकिन जब बोलते हैं तो उनके बयानों के कई मायने निकाले जाते हैं। दो दिन पहले उन्होंने विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की हार का प्रमुख कारण पार्टी की आपसी गुटबाजी को बताया। देर से ही सही, महंत ने सार्वजनिक रूप से पार्टी की गुटबाजी को स्वीकार कर लिया है। उनके इस बयान को भूपेश बघेल पर निशाने के तौर पर भी देखा जा रहा है।
एक ओर देशभर में कांग्रेस आंदोलन और धरना-प्रदर्शन के जरिए भाजपा पर हमलावर है, वहीं महंत ने गुटबाजी का मुद्दा उठाकर पार्टी के भीतर चल रही खींचतान को फिर चर्चा में ला दिया है। विधानसभा चुनाव में हार को करीब तीन साल होने जा रहे हैं, लेकिन कांग्रेस अब तक हार की ठीक से समीक्षा नहीं कर पाई है। पार्टी के भीतर लगातार समीक्षा की मांग भी उठती रही है। ऐसे में कांग्रेस हाईकमान को महंत के बयान के निहितार्थ समझने की जरूरत है। उनके बयान से पार्टी में खलबली मची है और आने वाले दिनों में शिकवे-शिकायतों का दौर तेज होने की संभावना है। अब देखना होगा कि इस पूरे मामले पर हाईकमान क्या रुख अपनाता है।
आरडीए में मचेगा बवाल
आरडीए की कचना-सड्डू नगर निगम योजना में अनियमितता का मामला सुर्खियों में हैं। हालांकि आरडीए प्रबंधन किसी तरह की अनियमितता से इंकार कर रहा है। मगर कांग्रेस के नेताओं ने दो दर्जन लोगों को गलत तरीके से प्लाट आबंटन की अनुशंसा के दावे किए हैं।
अगले कुछ दिनों में इसको लेकर खुलासे किए जाएंगे। यही नहीं, प्लाट आबंटन पर वन मंत्री केदार कश्यप भी कांग्रेस के निशाने पर होंगे। कश्यप परिवार की कंपनी से जुड़े कई दस्तावेज निकाले गए हैं। देर सबेर इसको लेकर आरडीए के विभागीय मंत्री को भी घेरने की तैयारी कर रही है। कुछ मिलाकर आरडीए प्लाट आबंटन पर प्रदेश की राजनीति गरमाने के आसार हैं।
