CHHATTISGARH : SC’s big decision in Anand Agarwal murder case!
रायपुर। रायगढ़ के बहुचर्चित आनंद अग्रवाल हत्याकांड में सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। सुप्रीम कोर्ट ने मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण और हाई कोर्ट के उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें आनंद अग्रवाल के परिवार को 8.60 लाख रुपये का मुआवजा देने का निर्देश दिया गया था।
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कोर्ट ने कहा कि सिर्फ इसलिए कि आनंद को आखिरी बार आरोपी की कार में देखा गया था और बाद में उसका शव मिला, यह साबित नहीं होता कि उसकी मौत मोटर वाहन के इस्तेमाल से हुई। मोटर वाहन अधिनियम के तहत मुआवजे के लिए वाहन और मौत के बीच सीधा और कानूनी रूप से स्वीकार्य संबंध साबित होना जरूरी है।
आनंद अग्रवाल 29 नवंबर 2009 को अपने परिचित दिलीप अग्रवाल की कार में गए थे। तीन दिन बाद उनका शव रायगढ़ के बिंजकोट गांव के पास मिला था। हत्या के मामले में दो लोगों को दोषी ठहराया गया था, लेकिन 2015 में हाई कोर्ट ने सबूतों की कमी के चलते उन्हें बरी कर दिया।
इसके बाद मृतक की पत्नी और बच्चों ने दावा किया कि हत्या कार के अंदर हुई थी, इसलिए उन्हें मोटर वाहन अधिनियम के तहत मुआवजा मिलना चाहिए। एमएसीटी ने पहले 5.64 लाख और हाई कोर्ट ने बढ़ाकर 8.60 लाख रुपये मुआवजा देने का आदेश दिया था।
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सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इस मामले में वाहन और अपराध के बीच वैसा संबंध साबित नहीं हुआ, जैसा रीता देवी केस में था। इसलिए मोटर वाहन अधिनियम के तहत मुआवजे का दावा नहीं बनता।
हालांकि, कोर्ट ने मानवीय आधार पर साफ किया कि अगर परिवार को मुआवजे की रकम पहले ही मिल चुकी है, तो उनसे यह राशि वापस नहीं ली जाएगी।
