NAKTI GAON POLITICS: ग्रामीणों की जमीन भू-माफियाओं को देने की बड़ी साजिश! 

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NAKTI GAON POLITICS: A major conspiracy to hand over villagers’ land to land mafias!

 

NAKTI GAON POLITICS: रायपुर के नकटी मामले में कांग्रेस जांच समिति ने प्रेसवार्ता कर भाजपा सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा कि कही मकसद नवा रायपुर क्षेत्र के नकटी गांव की जमीन पर भू-माफियाओं को लाभ पहुंचाना तो नहीं है।

कांग्रेस नेताओं ने 1930-31 की चकबंदी रिपोर्ट से लेकर 2024 में आवास सचिव के पत्र को दिखाते हुए कहा कि सभी सरकारी दस्तावेज ग्रामीणों के पक्ष में दिखाई देते हैं।

फिर भी छुट्टी के दिन सुबह-सुबह बड़ी संख्या में पुलिस बल के साथ तोड़फोड़ की कार्रवाई कर बस्तीवासियों को हटाया गया।

पूर्व मंत्री धनेंद्र साहू ने अक्टूबर 2024 में आवास सचिव की ओर से रायपुर कलेक्टर को लिखे गए पत्र को दिखाते हुए कहा कि इस पत्र में स्पष्ट लिखा गया है कि इसमें खसरा नंबर 460, 465, 524, 698, 700 और 701. कुल 29.172 हेक्टेयर भूमि आबंटन हेतु कलेक्टर पत्र लिखा है।

इसमें कच्चे-पक्के मकान बने हुए हैं। अतिक्रमण बढ़ते जा रहा. इससे जनप्रतिनिधियों को विशेष आवासीय योजना के तहत भूखंड दिए जाने में बाधा उत्पन्न होगा।

अतिक्रमण को हटाने और मंडल को शीघ्र भूमि उपलब्ध कराने की कार्यवाही करें, लेकिन गृह मंडल अध्यक्ष अनुराग सिंह देव कहते हैं कि हमने कोई जमीन नहीं मांगी. इस पत्र में लेकिन सब कुछ स्पष्ट हो रहा है.

उन्होंने यह भी कहा कि खसरा नंबर 407, 477 और 524 इन तीनों को मिलाकर 24 हेक्टेयर होता है. यह जमीन आज भी राजस्व रिकॉर्ड में सम्लित चारागाह के रूप में दर्ज है. इसमें शासकीय भूमि सिर्फ 3 हेक्टयर है. इसमें खसरा नंबर 698, 700 और 701 है, जो कि NRDA के नाम दर्ज है.

 

धनेंद्र साहू ने 1930-31 चकबंदी रिकॉर्ड को दिखाते हुए कहा कि नंबरदार हैं रामभरोसा दानी. उस समय के मालगुजार. इसमें 50-60 लोगों के नाम हैं, जो कि भू-स्वामी हैं. इसका शुरू से लगान पटते आ रहा है. यह सब सम्लित चारगाह की भूमि है. इस जमीन को किसी भी कीमत से नहीं ले सकती है. इसे अधिग्रहण से ही सरकार ले सकती है. इस पर निर्णय का अधिकार ग्राम सभा के पास होती है.

 

धनेंद्र साहू ने यह आरोप लगाते हुए यह भी कहा कि नकटी गांव के पास भाजपा नेताओं का भी कब्जा है. वहां से कब्जा क्यों नहीं हटाया जा रहा है. उन्होंने कहा कि नकटी गाँव के पास की जमीनों का ऑडिट किया जाना चाहिए. पता चल जाएगा कि वहां पर किस-किस का जमीन है. ग्रामीणों की बसाहट तो ग्राम सभा के अधिकार क्षेत्र से हुई है. पंचायत को अधिकार है आबादी की जमीन देने का. वैसे भी सरकारी रिकॉर्ड में वहाँ पर अभी ज्यादातर जमीन राजस्व रिकॉर्ड में है. 3 हेक्टयर जमीन पर ग्रामीणों की बसाहट है. जिस पर सभी सरकारी योजनाओं का लाभ ग्रामीणों को मिल रहा है. प्रधानमंत्री आवास, नल-जल योजना, सड़क, बिजली आदि. फिर उसे उजाड़ा जाना गलत है.

इस पूरे मामले में भाजपा सरकार घिर गई है। भाजपा संगठन के नेताओं से लेकर, हाउसिंग बोर्ड अध्यक्ष और मंत्री केदार कश्यप जैसे नेता झूठ बोल रहे हैं।

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