CHHATTISGARH: Indresh Kumar shares key strategy to overcome Maoism and religious conversion.
CHHATTISGARH: राष्ट्रीय सुरक्षा जागरण मंच (FANS) रायपुर चैप्टर द्वारा “माओवाद मुक्त छत्तीसगढ़ एवं वैचारिक घुसपैठ” विषय पर बौद्धिक परिचर्चा का आयोजन किया गया।
इस दौरान मंच के मुख्य संरक्षक एवं वरिष्ठ सदस्य अखिल भारतीय राष्ट्रीय कार्यकारिणी, RSS के वरिष्ठ प्रचारक इंद्रेश कुमार ने कहा कि आजादी के बाद से ही भारत अलगाववाद का दंश झेल रहा है।
पूर्वोत्तर के राज्यों से शुरू हुआ यह सिलसिला कश्मीर से पंजाब होते हुए मध्य भारत तक फैला। कहीं अलगाववाद, तो कहीं आतंकवाद, तो पंजाब में खालिस्तान की मांग हो। भारत के आदिवासी क्षेत्रों में माओवादियों ने अपनी जड़ों को मजबूत किया। माओवाद की आड़ में धर्मांतरण तीव्र गति से फैला।
केंद्र और राज्य सरकार की नीतियों और स्थानीय लोगों की संकल्प से छत्तीसगढ़ में माओवादियों को पीछे हटना पड़ा है, लेकिन अब सरकार और समाज की जिम्मेदारी और अधिक बढ़ गई है कि माओवादी पुनः पैर न पसारे, इसके लिए जरूरी है कि स्थानीय लोगों को सामाजिक, राजनीतिक आर्थिक और मानसिक रूप से मजबूत किया जाए।

नक्सल प्रभावित क्षेत्रों के युवाओं को स्वरोजगार प्रशिक्षण देकर आत्मनिर्भर बनाया जाए। घर की कामकाजी महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत किया जाए ताकि एक सुंदर भविष्य का निर्माण हो सके। छोटे – छोटे समूहों में लोगों को संगठित कर उन्हें भारतीय ज्ञान परंपरा एवं संस्कृति से रूबरू कराया जाए।
जिससे धर्मांतरण को रोका जा सकता है। आदिवासी संस्कृति और उनके विरासत को पूरा सम्मान और पहचान मिले, जिससे उन्हें गर्व की अनुभूति होगी। इस कार्य में सरकार के अलावा छोटे-बड़े सामाजिक संगठन महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
इंद्रेश कुमार ने कार्यक्रम में उपस्थित समाज के विभिन्न क्षेत्रों जैसे शिक्षाविद्, पत्रकार, पायलट, व्यवसायी, वकील, समाजसेवी तथा राजनीतिक कार्यकर्ताओं से आह्वान किया कि इस नेक कार्य में अपनी सहभागिता सुनिश्चित करें। तभी हम माओवादियों और धर्मांतरण जैसे वैचारिक लड़ाई से जीत पाएंगे।
अब छत्तीसगढ़ माओवाद से मुक्त हो गया है, तो हम सभी को मिलकर एक नये समाज के निर्माण में सहयोग करना है। इस अवसर पर मनु नाहर जी, राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य विशेष रूप से उपस्थित रहे।
साथ ही तौकीर रजा जी, डॉ. भूपेंद्र कुमार साहू , रितेंद्र नायक, रेखा शर्मा सहित अन्य लोगों की गरिमामयी उपस्थिति रही।
