नई दिल्ली/ख़बर चालीसा/प्रवर्तन निदेशालय ने आम आदमी पार्टी के नेता मनीष सिसोदिया को राउज एवेन्यू कोर्ट में पेश किया। इस दौरान ईडी ने सिसोदिया की 10 दिन की रिमांड मांगी। ईडी ने सुनवाई के दौरान दावा किया कि आबकारी नीति तैयार करने के पीछे साजिश थी। शराब नीति में नियम बदलकर कुछ खास लोगों को 6% की जगह 12% लाभ पहुंचाया गया। सिसोदिया से पूछताछ के लिए रिमांड जरूरी है। ईडी ने कोर्ट में कहा कि मनीष सिसोदिया और के कविता संपर्क में थे।
ईडी ने कोर्ट में दावा किया, इस नीति से दक्षिण की कंपनियों को लाभ पहुंचाया गया. बड़े कारोबारियों को फायदा पहुंचाया गया। सिसोदिया के कहने पर शराब नीति के नियम बदले गए। अवैध कमाई की व्यवस्था बनाई गई। थोक व्यापार का हिस्सा खास लोगों को दिया गया। 6% की जगह 12% का मार्जिन दिया गया। डिजिटल सबूत मिटाए गए।
ईडी ने कहा, 12 प्रतिशत मार्जिन के सवाल पर सिसोदिया गलत जवाब दे रहे थे। इस घोटाले में 219 करोड़ रुपये की ट्रेल मिली है। हमें पूरी कार्यप्रणाली की जांच करने और अन्य आरोपियों के सामने पूछताछ करने की जरूरत है। इसलिए 10 दिन की रिमांड मांगी है।
सिसोदिया के वकील ने कोर्ट में कहा कि जब सरकार की पॉलिसी बनती है तो कई स्तरों से गुजरती है। चुनी हुई सरकार के अलावा संबंधित विभाग, वित्त विभाग से होते हुए मसौदा उप राज्यपाल के पास जाता है। पूरी प्रक्रिया के बाद एलजी ने भी पॉलिसी को देखा समझा और मंजूरी दी। एलजी ने जो शिकायत की है, वो टेंडर जारी होने के बाद की है, पहले की नहीं। यहां एजेंसी टेंडर जारी होने से पहले की बात कर रही है।
26 फरवरी को गिरफ्तार हुए थे सिसोदिया
दरअसल, सीबीआई ने 26 फरवरी को दिल्ली की शराब नीति में कथित घोटाले के मामले में मनीष सिसोदिया को गिरफ्तार किया था। सीबीआई की 7 दिन की हिरासत के बाद राउज एवेन्यू कोर्ट ने उन्हें 20 मार्च तक न्यायिक हिरासत में भेज दिया था। सिसोदिया से तिहाड़ जेल में ईडी ने पूछताछ भी की थी।

