भूपेश बघेल के राम राम जपने के पीछे क्या है राजनीतिक रणनीति?

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रायपुर: छत्तीसगढ़ में इन दिनों भगवान राम के नाम पर राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है. छत्तीसगढ़ को भगवान राम का ननिहाल माना जाता है. इस लिहाज से प्रदेश में राम की चर्चा होनी कोई अनूठी बात नहीं है. पिछले कुछ दिनों से प्रदेश में भगवान राम के नाम को लेकर मुख्यमंत्री भूपेश बघेल लगातार बयान दे रहे हैं .मुख्यमंत्री बघेल, विपक्षी दल बीजेपी पर राम के नाम पर, राजनीति करने का आरोप लगा रहे है

मुख्यमंत्री भूपेश बघेल द्वारा भगवान राम को लेकर दिए जा रहे बयानों पर , बीजेपी नेता बृजमोहन अग्रवाल ने कहा है ” जब किसी का जाने का समय आता है, उस वक्त उसके मुंह से राम का नाम निकले तो उसे सद्गति प्राप्त होती है. मुझे लगता है कि सरकार का जाने का समय आ गया है “. इस विषय में राजनीतिक प्रेक्षक कृष्णा दास मानते हैं कि छत्तीसगढ़ भगवान राम की मां कौशल्या जी की जन्मभूमिहै. लिहाजा यहां के लोगों की आस्था राम के लिए राजनीति से हटकर भी रही है. कृष्णा दास ने यह भी कहा कि “राम और कृष्ण जैसे विषयों पर मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने बीजेपी को काफी पीछे छोड़ दिया है” .

सीएम ने बजेपी और आरएसएस पर साधा निशाना: छत्तीसगढ़ की राजनीति में पिछले दो दिनों से, राजनीतिक बयानबाजी के केंद्र में भगवान राम, हनुमान और भगवान श्री कृष्ण हैं. मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने सभी नगरीय क्षेत्रों में कृष्ण कुंज विकसित करने का ऐलान किया है. इसके कुछ ही समय बाद मुख्यमंत्री ने आरएसएस और बीजेपी पर निशाना साधते हुए इन पर ,शालीन छवि के भगवान राम को आक्रामक योद्धा की तरह प्रस्तुत करने का आरोप लगाया.

“बीजेपी वोट के लिए भगवान को याद करती है”: मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने नम्रता के प्रतीक हनुमान जी को क्रोधी दिखाए जाने पर भी आरएसएस को घेरा. आज फिर सीएम भूपेश बघेल ने बीजेपी पर आरोप लगाते हुए कहा ” ‘बीजेपी सिर्फ वोट के लिए ही भगवान को याद करती है. जब चुनाव आता है तब ही जय श्रीराम बोलते हैं. इसके बाद बीजेपी को भगवान याद नहीं आते.’ अयोध्या के मामले को लेकर सीएम ने कहा ‘1925 से 1980 तक ये क्या कर रहे थे, तब उन्हें राम की याद नहीं आई. लेकिन उन्होंने देखा कि इससे उन्हें वोट मिल सकता है तब उन्हें राम याद आये . राम मंदिर का केस तो आजादी के पहले से चल रहा था लेकिन ये चुप थे”

सीएम बघेल ने संतोष पांडेय से किया सवाल: मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने बीजेपी सांसद संतोष पाण्डेय से सवाल किया ‘ छत्तीसगढ़ में जब 15 साल जब बीजेपी की सरकार थी. उस समय राम वन गमन पथ क्यों नहीं बनाए ? मुख्यमंत्री बघेल ने कहा ” हम राम के नाम से वोट नहीं मांग रहे हैं. हमारी संस्कृति में राम बसे हुए हैं. गांव में गौपालक हैं. यादव समाज के लोग हैं.कृष्ण को कब से मानते आ रहे हैं. दीपावली के दोहे भी भगवान कृष्ण के नाम से हैं. साहू समाज के लोग भक्त माता कर्मा के साथ कृष्ण की पूजा कर रहे हैं.”

बघेल सरकार के जाने का समय आ गया: मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के बयान पर जवाब देते हुए, बीजेपी के वरिष्ठ नेता और विधायक बृजमोहन अग्रवाल ने तो यहां तक कह डाला ” जब किसी के जाने का समय हो और उसके मुंह से राम निकले तो उसे सद्गति प्राप्त होती है ” बृजमोहन अग्रवाल का मानना है ” अब इस सरकार का जाने का समय आ गया है “.

सीएम ने बीजेपी को पीछे छोड़ा: वरिष्ठ पत्रकार और राजनीतिक प्रेक्षक कृष्णा दास मानते हैं ” प्रदेश में मुख्यमंत्री भूपेश बघेल, राम और कृष्ण के नाम पर जो योजनाएं बना रहे हैं , इसमें उन्होंने बीजेपी को काफी पीछे छोड़ दिया है. इसे सटीक राजनीति भी कहा जा सकता है. कृष्णा दास का मानना है ” मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की व्यक्तिगत रूचि का भी यह विषय है. राम और कृष्ण मुख्यमंत्री और प्रदेश के लोगों की आस्था के साथ संस्कृति के भी प्रतीक है . छत्तीसगढ़ को भगवान राम का ननिहाल माना जाता है. इस वजह से प्रदेश के लोगों की आस्था भगवान राम के प्रति स्वाभाविक है.

वरिष्ठ पत्रकार कृष्णा दास के मुताबिक ,इस विषय पर राजनीतिक फायदा और नुकसान भी हो सकता है. वजह प्रदेश में कोई पोलराइजेशन की स्थिति नहीं है. किसी दो दलों के बीच में धर्म विशेष के लोग बंटे नहीं है. कांग्रेस अगर राम के मुद्दे को उठाती है तो दूसरे धर्म के लोगों पर किसी तरह का विपरीत प्रभाव नहीं पड़ेगा. कृष्णा दास का कहना है कि राम के मामले को उठाने से कांग्रेस का वोट बैंक बढ़ेगा ही, इसे मुख्यमंत्री की अच्छी रणनीति कर सकते हैं. दास मानते हैं ” इस विषय में मुख्यमंत्री बघेल ने बीजेपी को काफी पीछे रखने में सफलता प्राप्त की है “.

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