CG Congress: Allegation of withholding a body over a dispute regarding outstanding bills; Congress protests outside Hariom Hospital.
CG CONGRESS: बिलासपुर शहर के मस्तूरी मार्ग स्थित हरिओम अस्पताल में एक महिला मरीज की मौत के बाद शव सौंपने को लेकर भारी विवाद खड़ा हो गया। मृतका के परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन पर बकाया बिल जमा नहीं होने के कारण शव रोकने का गंभीर आरोप लगाया है। वहीं, अस्पताल प्रबंधन ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि परिजन अस्पताल में मौजूद नहीं थे। इस घटना के विरोध में गुरुवार को कांग्रेस नेताओं ने अस्पताल पहुंचकर जमकर हंगामा किया और प्रबंधन के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, महेंद्रगढ़ निवासी एक महिला 25 जुलाई को पेड़ से गिरकर गंभीर रूप से घायल हो गई थी, जिसके बाद उसे हरिओम अस्पताल में भर्ती कराया गया था। अस्पताल प्रबंधन का कहना है कि महिला की हालत लगातार गंभीर बनी हुई थी। 28 जुलाई को पुलिस और परिजनों को इसकी सूचना दी गई थी। इलाज के दौरान 29 जुलाई की सुबह महिला की मौत हो गई। प्रबंधन के मुताबिक, इलाज में काफी खर्च हुआ जबकि परिजनों ने केवल पांच हजार रुपये जमा किए थे। इसके बावजूद अस्पताल का दावा है कि उन्होंने शव को बंधक नहीं बनाया है और परिजन वैधानिक प्रक्रिया पूरी कर उसे ले जा सकते हैं।
दूसरी ओर, परिजनों का सीधा आरोप है कि बिल की बकाया राशि नहीं चुका पाने के कारण अस्पताल ने शव देने से मना कर दिया। घटना की जानकारी मिलने पर पूर्व जिला कांग्रेस अध्यक्ष विजय केसरवानी के नेतृत्व में बड़ी संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ता अस्पताल पहुंचे। उन्होंने अस्पताल के बाहर विरोध प्रदर्शन करते हुए प्रबंधन पर मनमानी का आरोप लगाया। कांग्रेस नेताओं ने सवाल उठाया कि यदि कोई परिवार आर्थिक रूप से कमजोर है, तो क्या अस्पताल को शव रोकने का अधिकार है? इसके अलावा, अस्पताल में मॉर्च्युरी (शवगृह) की सुविधा न होने के बावजूद शव रखे जाने पर भी गंभीर आपत्ति जताई गई।
पूरे मामले में हरिओम अस्पताल के संचालक अभिषेक कश्यप ने सफाई देते हुए कहा कि अस्पताल द्वारा सभी वैधानिक प्रक्रियाओं का पालन किया गया है और पुलिस को भी समय पर सूचना दी गई थी। हालांकि, कांग्रेस कार्यकर्ताओं का आक्रोश शांत नहीं हुआ है और उन्होंने अस्पताल प्रबंधन के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने तथा कलेक्टर से शिकायत करने की चेतावनी दी है।
यह मामला अब प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग के लिए जांच का विषय बन गया है। इस घटना ने एक बार फिर शहर के निजी अस्पतालों की कार्यप्रणाली और मरीजों के अधिकारों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सख्त नियमों के अभाव में निजी अस्पतालों द्वारा भारी-भरकम बिल थमाने और मरीजों-परिजनों के साथ कथित तौर पर अमानवीय व्यवहार की शिकायतें लगातार बढ़ती जा रही हैं।
