रायपुर। छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में भाजपा के आदिवासी नेताओं ने गुरुवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस ली। इस दौरान राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग के पूर्व अध्यक्ष एवं वरिष्ठ आदिवासी नेता नंदकुमार साय, प्रदेश महामंत्री केदार कश्यप, पूर्व प्रदेश अध्यक्ष विक्रम उसेंडी और जनजाति मोर्चा अध्यक्ष विकास मरकाम ने कई सवाल किए। नेताओं ने पूछा कि स्वतंत्रता प्राप्ति के 75 सालों में करीब 55 साल तक पंचायतों से लेकर पार्लियामेंट तक कांग्रेस का कब्जा रहा। अपने शासन के इन वर्षों में कांग्रेस ने जनजाति समूहों को उनके संवैधानिक अधिकारों से वंचित क्यों रखा?
न नेताओं ने राज्य के 42 जाति समूहों की अनुसूचित जनजाति में शामिल किए जाने पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रति आभार व्यक्त किया। साथ ही कहा कि इन जाति समूहों को मामूली तकनीकी गलतियों के कारण आदिवासी हितलाभ से वंचित रखे जाने के लिए कांग्रेस जिम्मेदार है। भाजपा नेताओं ने कहा कि, कांग्रेस झूठी वाहवाही लूटने की बीमारी से पीड़ित है। केंद्र सरकार के हर अच्छे निर्णय के लिए अपनी पीठ थपथपा लेते हैं।
अब केंद्र सरकार ने भाजपा की पहल पर छत्तीसगढ़ के 2 जाति समुदाय को उनका वह अधिकार दिया है, जो कांग्रेस मिलने नहीं दे रही थी, तब भी इसका जबरिया श्रेय लेने की प्रवृत्ति दिखाने से नहीं चूक रहे हैं। देश में जब डॉ. मनमोहन सिंह प्रधानमंत्री थे तो उन्हें कांग्रेसी चिद्ी लिखकर इन जनजातियों को उनका अधिकार दिलाने क्यों कुछ न कर सके? कांग्रेस के किस प्रतिनिधिमंडल ने कभी पीएम से कोई भेंट की?
पूर्व मंत्री केदार कश्यप और नंद कुमार साय ने कहा कि कांग्रेस के नेता जवाब दें कि क्या कभी प्रधानमंत्री से मिलकर इन जनजातियों को उनका अधिकार देने आग्रह किया? वे बताएं कि कांग्रेस के किस प्रतिनिधिमंडल ने कभी प्रधानमंत्री से कोई भेंट की? भाजपा नेताओं ने अपने प्रयासों का जिक्र करते हुए कहा कि वर्ष 2020 में भाजपा सांसदों और नेताओं के प्रतिनिधिमंडल ने प्रधानमंत्री और विभागीय मंत्री से मुलाकात कर इन जातियों को अनुसूचित जनजाति में शामिल करने की मांग के साथ ही तथ्यों से अवगत करा दिया था। कांग्रेस झूठा श्रेय न ले।

