तीन वर्ष की मासूम, नौ किलो वजन, हार्ट के पीछे डेढ़ किलो का ट्यूमर, 30 टुकड़ों में निकाला

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रायपुर। आंबेडकर अस्पताल के चिकित्सकों ने तीन वर्ष की एक बच्ची को नया जीवन दिया है। बच्ची के हार्ट के पीछ तीन किलो का ट्यूमर (कैंसर) था। आपरेशन न करने की स्थिति में बच्ची लगभग एक वर्ष तक ही जीवित रह पाती। स्वजन को यह सारी बातें बताकर उनकी सहमति से बच्ची का आपरेशन किया गया। ट्यूमर जिस स्थान पर था, वहां से उसे सीधे निकालना संभव नहीं था। इसलिए उसके 30 टुकड़े कर बाहर निकाला गया।

आपरेशन के बाद बच्ची को चार दिनों तक वेंटीलेटर में रखा गया। 18 दिनों के बाद उसे अस्पताल से डिस्चार्ज कर दिया गया है। अब वह चल-फिर रही है। सर्जरी करने वाले आंबेडकर अस्पताल के हार्ट, चेस्ट और वैस्कुलर सर्जन डा. कृष्णकांत साहू का कहना है कि बच्चे में गैन्ग्लियो न्यूरो फाइब्रोमा आफ लेफ्ट हीमोथोरेक्स (पोस्टीरियर मीडियास्टिनल ट्यूमर) के आपरेशन का प्रदेश में यह विशिष्ट केस है। देश में गिने-चुने ही ऐसे विशिष्ट केस हुए हैं।

पहले सर्जरी के लिए किया मना, फिर लिया रिस्क

डा. साहू ने बताया कि उन्होंने फेफड़े और छाती के कैंसर के 250 और पोस्टेरियर मेडिस्टाइनल ट्यूमर के 25 से भी ज्यादा आपरेशन कर चुके हैं, परंतु अभी तक तीन साल की बच्ची में इतना बड़ा पोस्टेरियर मेडिस्टाइनल ट्यूमर का केस पहली बार देखा। पहले तो आपरेशन के लिए मना कर दिया कि यह केस आपरेशन के लायक नहीं है, क्योंकि इसमें बच्चे के जान जाने की आशंका 90 से 95 प्रतिशत तक थी। स्वजन आपरेशन नहीं भी करवाते तो भी कैंसर बीमारी के कारण 100 प्रतिशत जान जाने की आशंका थी। पांच प्रतिशत सफलता की आशा के साथ बच्ची के माता-पिता की सहमति से वे आपरेशन के लिए तैयार हुए।

डा साहू ने बताया कि आपरेशन को पहले एसीआइ के हार्ट, चेस्ट और वैस्कुलर सर्जरी विभाग में करने के लिए प्लान किया गया, परंतु ट्यूमर के बहुत बड़े होने, मासूम की उम्र बहुत ही कम होने तथा हाई रिस्क केस होने के कारण एनेस्थीसिया विशेषज्ञों ने डीकेएस हास्पिटल के पीडियाट्रिक सर्जरी विभाग के आपरेशन थियेटर में आपरेशन की सलाह दी। डीकेएस सुपरस्पेशालिटी हास्पिटल के पीडियाट्रिक सर्जरी की एचओडी डा. शिप्रा शर्मा और डा. नितिन शर्मा से बात करके बच्ची को शिफ्ट किया गया।

बच्ची की छाती के महत्वपूर्ण अंगों को बचाते हुए करीब 1.5 किलोग्राम का ट्यूमर पूर्णतः निकाला गया। ट्यूमर इतना बड़ा था कि इसे टुकड़ों में निकालना पड़ा। जिस स्पाइनल कार्ड से ट्यूमर हुआ था, वहां भी बारीकी से उसके हर हिस्से को निकाला गया। स्पाइनल कार्ड को बचाते हुए ड्यूरा मेटर को भी रिपेयर किया गया, जिससे स्पाइल फ्लुइड लीकेज नहीं हो सके। बच्ची को चार दिनों तक वेंटिलेटर में रखना पड़ा। आपरेशन के बाद करीब 10 दिनों तक बच्ची की हालत नाजुक थी। डा. साहू ने बताया कि बच्ची की सर्जरी आयुष्मान योजना के तहत पूरी तरह से निश्शुल्क हुई है।

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