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तिरछी नजर : सर्वे की कथा

चुनाव से पहले कांग्रेस लगातार सर्वे करा रही है ।पिछले दिनों जयसिंह अग्रवाल ने एक सर्वे रिपोर्ट को लेकर कांग्रेस महासचिव पीएल पुनिया पर सवाल उठा दिया था। इस सर्वे रिपोर्ट में जयसिंह अग्रवाल के बारे में कुछ टिप्पणी की गई थी। इस रिपोर्ट के बाद जयसिंह ने मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को कुछ तथ्यों के साथ चार पेज का पत्र लिखकर तमाम स्थितियों से अवगत कराया है। कहा जा रहा है कि कोरबा के विधायक जयसिंह अपने स्थिति का आकलन कराने खुद लगातार सर्वे कराते रहते हैं और उसके अनुसार रणनीति बनाते हैं। मरवाही चुनाव के दौरान दो सर्वे हुआ। जिसमें जयसिंह ने प्रभारी के नाते खुद सर्वे कराया और परिणाम भी वही आया। अभी गुजरात में गांधी नगर लोकसभा क्षेत्र के 7 विधानसभा सीट की जिम्मेदारी दी गई है। जिसमें से एक सीट पर गुजरात के मुख्यमंत्री चुनाव लड़ रहे हैं। इसका भी सर्वे कराकर चुनाव प्रचार की रणनीति बना रहे हैं। छत्तीसगढ़ में कांग्रेस सर्वे की भी कई कहानियाँ चर्चा में है ।
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फोन टैपिंग की आशंका
इनकम टैक्स, ईडी के लगातार छापों से सरकारी कामकाज बुरी तरह प्रभावित है। आशंका है कई मंत्रियों और अफसरों के फोन टेप हो रहे हैं, उन पर नजर रखी जा रही है। टैपिंग की भनक लगते ही वाटॅ्सअप कॉल तक कई मंत्रियों और करीबी लोगों ने बंद कर दिये हैं। अनजान फोन नहीं उठा रहे हैं। एक केन्द्रीय नेता ने पिछले दिनों एक मंत्री को फोन किया उसका नंबर सेव नहीं होने के कारण मंत्री ने फोन नहीं उठाया। बाद में उस नंबर को एक अपने करीबी से चेक कराया तो पता लगा कि एक फोन दिग्गज कांग्रेसी नेता का है । इसके बाद फोन लगाकर बातचीत की, इस तरह डर कांग्रेस के खेमे में समाया है। संवेदनशील मुद्दों पर बड़े अफसर अपने पीए से भी फोन में बात नहीं कर रहे हैं। जिन मंत्रियों को निशाने पर लिये गये हैं ऐसे मंत्रियों ने तो अपने बंगले पर क्षेत्र के जरूरतमंद को छोड़कर अन्य चर्चित चेहरों की प्रवेश पर अघोषित प्रतिबंध लगा दिया गया है। केन्द्र के एजेंसियों के रूख का पता लगा रहे हैं और उनके जाने का इंतजार कर रहे हैं।
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स्मृति ईरानी के बहाने
केन्द्रिय मंत्री स्मृति ईरानी के दौरे के दौरान विमानतल में स्वागत से लेकर रैली के भाषण तक राजनीतिक गलियारे में चर्चा है। इस दौरान किसको महत्व मिला इसकी समीक्षा हो रही है। यह कहा जाता है कि महिला ही महिला की विरोधी होती है, भाजपा महिला मोर्चा के भीतर के झगड़े बाहर आ रही है। सोशल मीडिया में इस पर चटकारे विरोधी खूब ले रहे हैं।

ट्रांसपोर्टरों का दबदबा
भानुप्रतापपुर सीट से कांग्रेस टिकट के लिए 14 दावेदार सामने आए, तो इसकी पार्टी के भीतर काफी चर्चा हुई। यह तय है कि पार्टी दिवंगत विधायक मनोज मंडावी की पत्नी सावित्री मंडावी को प्रत्याशी बनाएगी, फिर भी इतने दावेदार सक्रिय क्यों हैं? इसके पीछे की वजह जानने की कोशिश भी हो रही है। यह बात सामने आई है कि ज्यादातर दावेदारों के पीछे ट्रांसपोर्टरों की ताकत है। भानुप्रतापपुर में हजार से ज्यादा ट्रकें हैं। और ये सभी खदानों से अयस्क के परिवहन से जुड़ी हैं। जिले के सभी स्थानीय बड़े नेताओं की गाडिय़ां अयस्क परिवहन में लगी हुई है और वो मोटा माल भी बना रहे हैं। स्थानीय विधायक भी ट्रांसपोर्टर लॉबी के प्रभाव में रहते हैं। ऐसे में ट्रांसपोर्टरों की कोशिश है कि जो भी विधायक बने, वो अपना हो। यही वजह है कि ट्रांसपोर्टरों के प्रभाव में दावेदारों की फौज खड़ी हो गई है।
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दीवाली मिलन भारी पड़ा…
पिछले दिनों दीवाली की बधाई देने पहुंचे एक कारोबारी को बिलासपुर संभाग के एक जिले के आला पुलिस अफसर ने खूब फटकार लगाई। हुआ यूं कि कारोबारी के यहां आईटी की रेड पड़ी थी। आईटी वाले कुछ कागजात भी ले गए। कागजों में लेन-देन का ब्यौरा भी था।
बताते हैं कि पुलिस अफसर ने कारोबारी के काम के एवज में कुछ नजराना कबूल कर लिया था। अब कारोबारी के एकाउंटेट ने डायरी में इसका जिक्र कर दिया। आईटी वाले कागजात की जांच पड़ताल में जुटे, तो पुलिस अफसर भी लपेटे में आ गए थे। किसी तरह अपने संपर्कों का उपयोग कर अफसर मामले को दबा पाए। अब ऐसी लापरवाही से गुस्सा तो आएगा ही। कारोबारी ने किसी तरह माफी मांगकर अफसर का गुस्सा शांत किया।
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बड़े लोगों की बड़ी बातें
कोयला कारोबार और परिवहन की ईडी जांच कर रही है। अब तक आईएएस समीर विश्नोई और तीन कारोबारी को ईडी हिरासत में ले चुकी है। कई से पूछताछ हो रही है। इससे प्रदेश के उद्योग जगत में दहशत है। कहा जा रहा है कि ईडी की जांच के चलते कई दलाल भी सक्रिय हो गए हैं।
चर्चा है कि एक कारोबारी ने तो केस को निपटाने के लिए 30 सीआर की पेशकश की थी। लेकिन 100 सीआर से नीचे कोई बात करने के लिए तैयार नहीं था। एक-दो लोग तो मुंबई के एक मीडिया हाउस से जुड़े लोगों के मार्फत भी कोशिश की। हल्ला तो यह भी है कि मीडिया हाउस के लोग पहले भी कुछ केसेस में ढिलाई बरतवाने में कामयाब हो चुके हैं। लेकिन इस बार वैसी मदद नहीं हो पा रही है। जितनी मुंह, उतनी बातें। बड़े लोगों की बड़ी बातें।
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संतों का सानिध्य
गुढिय़ारी में कथाकार प्रदीप मिश्रा के शिव महापुराण सुनने के लिए श्रद्धालुओं की ऐसी भीड़ उमड़ी, जिसने पिछले सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए। रोज दो लाख से अधिक लोग जुटे। भीड़ देखकर राजनेताओं का ललचाना स्वाभाविक था। कई नेता किसी तरह वीवीआईपी पास हासिल करने में जुटे रहे। ये अलग बात है कि मुख्य कर्ताधर्ता बसंत अग्रवाल की छवि अच्छी नहीं रही है। और उनके खिलाफ अवैध प्लाटिंग करने की कई शिकायतें हैं। फिर भी आम लोगों को इससे क्या लेना-देना, वो तो शिव महापुराण का श्रवण करने आए थे। इतनी भीड़ दिक्कतों के बावजूद खुश थे। इससे बसंत अग्रवाल की अलग ही छवि बनी है। उन्हें भाजपा से रायपुर पश्चिम अथवा साजा से टिकट के प्रमुख दावेदारों में माना जा रहा है। संतों के सानिध्य का फायदा तो मिलता ही है।

 

R.O. No. 12237/11

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