SUPREME COURT VERDICT: Supreme Court delivers major ruling on illegal constructions!
SUPREME COURT VERDICT: सुप्रीम कोर्ट ने अवैध निर्माण गिराने से जुड़ी जनहित याचिका का निपटारा करते हुए पूरे देश के लिए एक समान नीति बनाने से इनकार कर दिया। CJI सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि यह मुख्य रूप से नीतिगत मामला है और अलग-अलग राज्यों की परिस्थितियां अलग हैं।
कोर्ट ने याचिकाकर्ता NGO को केंद्र, राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के सामने अपनी मांग रखने की स्वतंत्रता दी। याचिका में अवैध निर्माणों पर कार्रवाई के दौरान आश्रय, आजीविका और गरिमा के अधिकार का भी ध्यान रखने की मांग की गई थी।
कोर्ट ने माना कि कई जगह दशकों तक अनधिकृत निर्माणों को पानी-बिजली जैसी सुविधाएं और टैक्स वसूली के जरिए अप्रत्यक्ष मान्यता मिलती रही, लेकिन बाद में उन्हें गिराने की कार्रवाई हुई। हालांकि अदालत ने कहा कि ऐसे मामलों का समाधान नीति और उचित प्रक्रिया के तहत किया जाना चाहिए।
पीठ ने स्पष्ट किया कि मनमानी कार्रवाई या उचित प्रक्रिया का पालन न होने पर कोर्ट हस्तक्षेप कर सकता है। साथ ही, सुप्रीम कोर्ट ने अवैध निर्माण गिराने को लेकर पहले जारी दिशा-निर्देशों का भी उल्लेख किया।
कोर्ट ने उम्मीद जताई कि सरकारें नगर नियोजन और भवन कानूनों के पालन के साथ प्रभावित परिवारों के हितों का भी संतुलन बनाए रखेंगी।
