RAPE ATTEMPT VERDICT : Is removing salwar not an attempt to rape?
पटना. पटना हाईकोर्ट के एक फैसले पर अब सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई शुरू हो गई है। मामला 2008 में बिहार के बांका में दर्ज रेप की कोशिश के केस से जुड़ा है।
पटना हाईकोर्ट ने 9 जुलाई 2026 को आरोपी हिमांशु को बरी करते हुए कहा था कि महिला की सलवार उतारने की कोशिश और सीने को दबाने की घटना से रेप की कोशिश का अपराध साबित नहीं होता। कोर्ट ने मेडिकल एविडेंस और अन्य गवाहियों में कमियों का भी जिक्र किया था।
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अब सुप्रीम कोर्ट की CJI सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की बेंच इस आदेश पर सुनवाई कर रही है। CJI ने टिप्पणी की कि हाईकोर्ट के फैसले में कुछ टिप्पणियां आपत्तिजनक हैं। उन्होंने यह भी कहा कि आरोपी का पक्ष सुनने के बाद आदेश को खारिज किया जा सकता है।
सुप्रीम कोर्ट ने बिहार के एडवोकेट जनरल एसडी संजय से कहा है कि स्थानीय पुलिस के जरिए आरोपी को नोटिस भेजा जाए।
यह मामला इसलिए भी अहम है क्योंकि इससे पहले सुप्रीम कोर्ट इलाहाबाद हाईकोर्ट के ऐसे ही एक फैसले को खारिज कर चुका है। उस मामले में नाबालिग की छाती दबाने और पायजामे का नाड़ा तोड़ने की घटना को रेप की कोशिश नहीं माना गया था।
इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने यौन अपराधों की सुनवाई को लेकर न्यायपालिका के लिए संवेदनशीलता और पीड़ित-केंद्रित दृष्टिकोण से जुड़ी गाइडलाइन को भी मंजूरी दी थी।
अब बड़ा सवाल यही है कि क्या सुप्रीम कोर्ट पटना हाईकोर्ट के इस फैसले को भी खारिज करेगा? इसका अंतिम जवाब सुप्रीम कोर्ट की आगे की सुनवाई और आदेश से ही साफ होगा।
