Serious allegations against a clerk posted in Kawardha tehsil for 10 years, action stalled despite complaints
कवर्धा। कवर्धा तहसील कार्यालय में पिछले एक दशक से जमे बाबू पर लगातार भ्रष्टाचार, फाइलों में देरी और पैसे लेकर कार्य करवाने के गंभीर आरोप लगे हैं, लेकिन बार-बार शिकायतों के बावजूद प्रशासनिक कार्रवाई का इंतज़ार आज भी जारी है।
स्थानीय नागरिकों, किसानों और भूमि संबंधी कार्य करवाने वाले आवेदकों का कहना है कि संबंधित बाबू के बिना डायवर्सन, नामांतरण, बंटवारा, नक्शा, नकल, सीमांकन सहित कोई भी फाइल आगे नहीं बढ़ती। आरोप है कि बिना रुपये की वसूली के किसी भी आवेदन पर ‘नोटिंग’ तक नहीं की जाती।
कार्रवाई क्यों नहीं? सवालों के घेरे में प्रशासन
सबसे बड़ा सवाल यह है कि शिकायतें सीधे कलेक्टर कार्यालय तक पहुँचने और जांच के निर्देश जारी होने के बावजूद संबंधित कर्मचारी को अब तक हटाया नहीं गया।
सूत्रों का दावा है—
बाबू के ऊपरी अधिकारियों तक मजबूत पहुँच
राजनीतिक संरक्षण
फाइलों में जानबूझकर तकनीकी खामियां बता कर देरी
ट्रांसफर आदेश जारी होने के बाद भी “समायोजन” के नाम पर पदस्थापना जारी
इसी वजह से दस साल से एक ही जगह जमे रहने का रिकॉर्ड सामान्य नहीं माना जा रहा है।
जनता का आरोप, अधिकारी खामोश
कई आवेदकों ने मीडिया के माध्यम से कहा कि—
फाइलों का निपटान तय समय में नहीं होता
चक्कर लगवाकर परेशान किया जाता
जब तक “राशि तय” न हो जाए, फाइल टेबल से आगे नहीं बढ़ती
वहीं दूसरी ओर तहसील प्रशासन इस मुद्दे पर चुप्पी साधे हुए है। जवाबदेही और पारदर्शिता की बात केवल कागज़ों में दिख रही है।
कार्रवाई की मांग तेज
शिकायतकर्ताओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने तुरंत प्रभाव से निलंबन, स्थानांतरण और आर्थिक लेनदेन की जांच की मांग की है। उनका कहना है कि—
> “एक ही सीट पर 10 साल जमे रहना अपने आप में भ्रष्टाचार का प्रमाण है। यदि कार्रवाई नहीं होती तो यह मिलीभगत मानी जाएगी।”
कवर्धा तहसील का यह मामला अब जनता बनाम तंत्र की पारदर्शिता की लड़ाई जैसा हो चुका है। प्रश्न यह नहीं कि शिकायतें हैं, बल्कि यह है कि कार्रवाई आखिर कब होगी?
अब निगाहें जिला प्रशासन पर हैं—क्योंकि जनता उम्मीद कर रही है कि इस बार मामले को दबाया नहीं, साफ-साफ निपटाया जाएगा।

