CG COOPERATIVE BANK SCAM : After suspension, reinstatement without investigation, questions on the cooperative bank…
रायपुर/राजनांदगांव। छत्तीसगढ़ राज्य सहकारी बैंक की राजनांदगांव जिला सहकारी केंद्रीय बैंक में एक बार फिर प्रशासनिक पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। अवैध नियुक्ति और वेतन भुगतान जैसे गंभीर आरोपों में निलंबित किए गए सीईओ सुधीर कुमार सोनी को बिना जांच प्रतिवेदन के दोबारा उसी पद पर बहाल कर दिया गया है। यही नहीं, जहां अनियमितता हुई, वहीं उन्हें फिर से जिम्मेदारी सौंप दी गई।
पूरा मामला वर्ष 2022-23 का है, जब राजनांदगांव जिला सहकारी केंद्रीय बैंक में दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों की कथित अवैध नियुक्ति और वेतन भुगतान किया गया। इस मामले में आयुक्त सहकारिता एवं पंजीयक सहकारी विभाग के.एन. कांडे ने 28 जून 2024 को तत्कालीन सीईओ सुधीर कुमार सोनी को निलंबित कर दिया था। आदेश क्रमांक 1233(अ) के तहत उन्हें पद के प्रभाव से हटाया गया।
लेकिन हैरानी की बात यह है कि 19 सितंबर 2025 को बिना किसी सार्वजनिक जांच प्रतिवेदन, बिना कार्रवाई की जानकारी दिए सुधीर सोनी की सेवा बहाली का आदेश जारी कर दिया गया। न तो यह स्पष्ट किया गया कि जांच में क्या निष्कर्ष निकला, न ही यह बताया गया कि किस नियम के तहत उसी बैंक और लगभग उसी पद पर दोबारा पदस्थ किया गया।
उठते हैं कई सुलगते सवाल
क्या सहकारी बैंक की सेवा नियमावली निलंबित अधिकारी को उसी स्थान पर पुनः पदस्थ करने की अनुमति देती है?
अगर हां, तो संबंधित नियम सार्वजनिक क्यों नहीं किया गया?
अगर मामला अब भी लंबित है, तो बहाली किसके आदेश पर हुई?
क्या यह बहाली जांच को प्रभावित करने या मामले को दबाने की कोशिश है?
क्या राज्य सहकारी विभाग या नाबार्ड को इसकी सूचना दी गई?
अधिकारी चुप, फोन नहीं उठ रहे
इस पूरे मामले में रायपुर से लेकर राजनांदगांव तक सहकारी बैंक के जिम्मेदार अधिकारी चुप्पी साधे हुए हैं। बैंक अध्यक्ष सचिन बघेल, पंजीयक, सीईओ कोई भी सवालों का जवाब नहीं दे रहा। फोन कॉल और मैसेज का भी जवाब नहीं मिल रहा है। सूचना के अधिकार के तहत बहाली से जुड़ी जानकारी मांगने पर भी स्पष्ट जवाब नहीं दिया गया।
अपैक्स बैंक अध्यक्ष का बयान
मामले पर अपैक्स बैंक के अध्यक्ष केदार गुप्ता ने कहा कि यह अनियमितताएं कांग्रेस शासनकाल में हुई थीं। उन्होंने दावा किया कि मौजूदा सरकार में भ्रष्टाचार के लिए कोई जगह नहीं है और पूरे मामले की जानकारी लेकर यह देखा जाएगा कि उस समय क्या-क्या कार्रवाई हुई थी।
बड़ा सवाल
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की सरकार जीरो टॉलरेंस और पारदर्शिता की बात करती है, लेकिन जिस अधिकारी पर अवैध नियुक्ति और वेतन भुगतान जैसे गंभीर आरोप रहे हों, उसे बिना जांच रिपोर्ट के फिर उसी संवेदनशील पद पर बैठाना क्या वाकई जीरो टॉलरेंस है या फिर सिस्टम की पुरानी बीमारी?

