तंबाकू को करें तौबा, जानें इसका इतिहास, महत्व और थीम

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भारत( india) में लगभग 27 करोड़ लोग तंबाकू का सेवन करते हैं। इसके अलावा लगभग 12 करोड़ लोग धूम्रपान के आदी हैं। भारत में तंबाकू के कारण प्रतिवर्ष लगभग 12 लाख लोगों की मृत्यु हो जाती है। ग्लोबल एडल्ट टोबैको सर्वे (2016-2017) के अनुसार भारत में तंबाकू सेवन प्रारंभ करने की औसत आयु 18.7 वर्ष है और महिलाओं( women) की तुलना में पुरुष कम उम्र में तंबाकू का सेवन शुरू कर देते हैं।

वर्तमान में अधिकांश बीमारियों की वजह तंबाकू है। इसके कारण 25 तरह की बीमारियां और लगभग 40 प्रकार का कैंसर हो सकता है। इसमें मुंह, गले, फेफड़े, प्रोस्टेट और पेट का कैंसर( cancer) प्रमुख हैं।

मृत्यु में 50 फीसद मौतों( death) का कारण धूम्रपान

विश्वभर में होने वाली मृत्यु में 50 फीसद मौतों का कारण धूम्रपान है। धूम्रपान का सीधा असर फेफड़ों में पड़ता है। इससे रक्त संचार, ब्लड प्रेशर और सांस फूलने की बीमारी होती है।

जाने इतिहास ( history)

विश्व स्वास्थ्य संगठन वैश्विक तंबाकू संकट और महामारी से होने वाली बीमारियों और मौतों के बढ़ते मामलों को देखते हुए साल 1987 में पहला ‘विश्व तंबाकू निषेध दिवस’ बनाया. 1987 में विश्व स्वास्थ्य सभा ने संकल्प WHA40.38 पारित किया, जिसमें 7 अप्रैल को “विश्व धूम्रपान निषेध दिवस” मनाने का प्रस्ताव रखा गया. इसके बाद 1988 में संकल्प WHA42.19 पारित किया गया, जिसमें 31 मई को ‘विश्व तंबाकू निषेध दिवस’ के रूप में जारी किया गया।

क्या है थीम ( theme)

इस बार ‘विश्‍व तंबाकू निषेध दिवस’ की थीम है– ‘पर्यावरण की रक्षा करें’

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