पत्रकार: दीपक तिवारी
कवर्धा/कबीरधाम जिले में पिछले खरीफ सीजन 2024–25 के दौरान धान खरीदी व्यवस्था में सामने आई करीब 40,000 कुंटल धान की भारी कमी अब एक बड़े घोटाले की ओर इशारा कर रही है। सवाल यह है कि इतनी बड़ी मात्रा में धान आखिर गया कहां? हैरानी की बात यह है कि इस गंभीर अनियमितता के बावजूद जिला प्रशासन ने आज तक न तो ठोस जांच कराई, न किसी पर कार्रवाई हुई और न ही एक रुपये की वसूली।
जांच क्यों नहीं, कार्रवाई क्यों नहीं?
सूत्रों के मुताबिक धान की यह कमी किसी एक केंद्र तक सीमित नहीं, बल्कि जिले के कई धान खरीदी केंद्रों में अनियमितता की आशंका है। जानकारों का दावा है कि अगर आज भी निष्पक्ष जांच कराई जाए, तो हर केंद्र में 200 से 500 कुंटल तक धान की कमी निकल सकती है। ऐसे में सवाल उठता है—
- क्या जिला प्रशासन की मिलीभगत से यह घोटाला दबाया जा रहा है?
- या फिर ऊपर तक किसी का संरक्षण प्राप्त है, जिसके चलते फाइलें धूल खा रही हैं?
- करोड़ों का खेल, जिम्मेदार कौन?
40 हजार कुंटल धान की कीमत करोड़ों रुपये में बैठती है। यह सीधे-सीधे किसानों के हक पर डाका और सरकारी खजाने को चूना लगाने जैसा है। इसके बावजूद प्रशासनिक चुप्पी कई संदेह खड़े करती है।
क्या धान खरीदी केंद्रों के प्रबंधक, समिति कर्मचारी, और ऊपर तक के अधिकारी इस खेल में शामिल हैं?
यदि नहीं, तो फिर कार्रवाई से डर क्यों?
सरकार की चुप्पी पर सवाल
यह भी बड़ा सवाल है कि सरकार आखिर क्यों आंख मूंदे बैठी है?
जहां छोटे मामलों में तत्काल कार्रवाई होती है, वहीं इतने बड़े घोटाले पर सन्नाटा क्यों? क्या यह मामला ठंडे बस्ते में डाल दिया गया है?
निष्पक्ष जांच की मांग
जिले के जागरूक नागरिकों और किसान संगठनों की मांग है कि—
सभी धान खरीदी केंद्रों का विशेष ऑडिट कराया जाए
जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों पर एफआईआर दर्ज हो
करोड़ों की राशि की वसूली की जाए
जब तक यह नहीं होता, तब तक यह सवाल गूंजता रहेगा कि धान गायब हुआ या सिस्टम ने निगल लिया?
(यह खबर उपलब्ध तथ्यों, स्थानीय सूत्रों और आरोपों पर आधारित है। प्रशासन का पक्ष आना शेष है।)

