नगर पालिका कवर्धा में कमीशन का खुला खेल! 12% कमीशन तय, टेंडर बाद में—काम पहले?

Date:

कवर्धा। नगर पालिका कवर्धा में विकास कार्यों के नाम पर कमीशन का संगठित खेल चलने के गंभीर आरोप सामने आ रहे हैं। सूत्रों के अनुसार नगर पालिका क्षेत्र में होने वाले लगभग हर ठेके में 12 प्रतिशत तक कमीशन तय बताया जा रहा है। यह कमीशन अलग-अलग स्तर पर बंटता है, जिससे पूरा सिस्टम ही सवालों के घेरे में आ गया है।

सूत्रों का दावा है कि इस कथित कमीशन व्यवस्था में

  • 1% मुख्य नगर पालिका अधिकारी (CMO)
  • 0.5% बाबू/लिपिक वर्ग
  • 1% इंजीनियर (EE)

जबकि शेष हिस्सा अन्य जिम्मेदारों तक पहुँचता है।

टेंडर बाद में, काम पहले!

सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि कई मामलों में बिना टेंडर प्रक्रिया पूरी किए ही ठेके दे दिए जाते हैं। काम पहले शुरू हो जाता है और औपचारिकता निभाने के लिए टेंडर प्रक्रिया बाद में पूरी की जाती है। यह पूरा मामला शासन के नियमों और वित्तीय पारदर्शिता पर सीधा सवाल खड़ा करता है।

नगर विकास या कमीशन विकास?

स्थानीय नागरिकों का कहना है कि जब ठेके गुणवत्ता के बजाय कमीशन के आधार पर दिए जाएंगे, तो विकास कार्यों की गुणवत्ता कैसी होगी, इसका अंदाजा लगाया जा सकता है। सड़कों, नालियों, निर्माण कार्यों में बार-बार मरम्मत इसी कथित खेल की ओर इशारा करती है।

प्रशासन की चुप्पी संदेह पैदा करती है

इन आरोपों पर अब तक नगर पालिका प्रशासन की ओर से कोई स्पष्ट प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। न ही किसी स्वतंत्र जांच की घोषणा की गई है। प्रशासन की यह चुप्पी संदेह को और गहरा कर रही है।

जांच की मांग

शहर के जागरूक नागरिकों और सामाजिक संगठनों ने

  • टेंडर प्रक्रिया की निष्पक्ष जांच
  • पिछले वर्षों के ठेकों का ऑडिट
  • और कमीशनखोरी की उच्चस्तरीय जांच

की मांग की है।

अब देखने वाली बात यह होगी कि शासन-प्रशासन इस कथित कमीशन राज पर कब और क्या कार्रवाई करता है, या फिर यह मामला भी फाइलों में दबकर रह जाएगा।

 

Share post:

Subscribe

spot_imgspot_img
spot_imgspot_img

#Crime Updates

More like this
Related